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एक क्लिक पर पढ़ें 14 अक्टूबर AMU की सभी ख़बरें

डॉ. मोहम्मद शुएब को आईईईई का सीनियर सदस्य बनाया गया

अलीगढ़, 14 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद शुएब को विश्व की प्रतिष्ठित संस्था इंस्टिट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स (आईईईई) का सीनियर मेंबर बनाया गया है।

आईईईई का सीनियर मेंबर ग्रेड एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, यह उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने तकनीकी और पेशेवर क्षेत्रों में असाधारण योगदान दिया हो। यह गौरव केवल आईईईई के कुल चार लाख से अधिक सदस्यों में से लगभग दस प्रतिशत लोगों को ही प्राप्त होता है।

डॉ. शुएब ने प्रो. एम. सारोश उमर के निर्देशन में “ए नोवल फ्रेमवर्क टू डिटेक्ट एंड मिटिगेट फिशिंग अटैक्स” विषय पर पीएचडी पूरी की। उन्हें यह सम्मान साइबर सुरक्षा और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में उनके अनुसंधान और शिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान पर प्रदान किया गया है।

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एएमयू के सैयद हामिद सीनियर सेकेंडरी स्कूल (ब्वॉयज) में सर सैयद डे अन्तर-स्कूल कार्यकर्मों का आरम्भ

अलीगढ़, 14 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सैयद हामिद सीनियर सेकेंडरी स्कूल (ब्वॉयज) में सर सैयद डे सेलिब्रेशन के अंतर्गत अन्तर-स्कूल कार्यकर्मों का शुभारंभ स्कूल ऑडिटोरियम में आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। यह कार्यक्रम एएमयू के संस्थापक, दूरदर्शी शिक्षाविद् सर सैयद अहमद खां को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से आयोजित विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की श्रृंखला की शुरुआत का प्रतीक था।

मुख्य अतिथि इंजीनियर नसीम अहमद खां ने विद्यार्थियों से सर सैयद के आधुनिक शिक्षा, तर्कशीलता और राष्ट्रीय सेवा के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि प्रो. कुदसिया तहसीन और प्रो. जहांगीर वारसी ने विद्यार्थियों को सर सैयद के बौद्धिक जागरण और सामाजिक सुधार के मिशन को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम की शुरुआत कार्यवाहक प्राचार्य सबाहुद्दीन के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने सर सैयद की दूरदर्शी सोच के स्थायी महत्व और उसके आधुनिक युग में प्रासंगिक बने रहने पर प्रकाश डाला। उप प्राचार्य मोहम्मद जावेद खां ने छात्रों से सप्ताह भर चलने वाले समारोहों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

कार्यक्रम संयोजक अश्हद जमाल ने स्मृति चिह्न भेंट किए और सप्ताहभर चलने वाले आगामी आयोजनों की जानकारी दी। उद्घाटन दिवस पर कई साहित्यिक प्रतियोगिताओं की शुरुआत हुई, जिनमें “21वीं सदी में सर सैयद के दृष्टिकोण की प्रासंगिकता” विषय पर भाषण प्रतियोगिता, क्विज ऑन सर सैयद एंड द अलीगढ़ मूवमेंट, और अंग्रेजी, हिंदी व उर्दू में निबंध लेखन प्रतियोगिताएं शामिल थीं। एएमयू के विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने इन प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

समापन सत्र में कार्यक्रम समन्वयक गुफरान अहमद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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एएमयू के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में खेलकूद गतिविधियों की शुरुआत

अलीगढ़, 14 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में नए शैक्षणिक सत्र की वार्षिक खेलकूद गतिविधियों की शुरुआत विभाग परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ छात्र स्पोर्ट्स कमेटी ने प्रो. सलमा अहमद (चेयरपर्सन) के मार्गदर्शन में किया। इस अवसर पर डॉ. आसिफ अली सैयद और डॉ. लामे बिन सबिर सहित विभाग के शिक्षकगण और छात्र उपस्थित रहे।

उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत जोश और उत्साह के साथ हुई। वर्ष की पहली खेल प्रतियोगिता रस्साकशी आयोजित की गई, जिसमें शिक्षकों, एमबीए प्रथम वर्ष और अंतिम वर्ष के छात्रों ने मिलकर भाग लिया। प्रतियोगिता में सभी ने शानदार टीम भावना, समन्वय और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का परिचय दिया।

कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। स्पोर्ट्स कमेटी ने सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों का धन्यवाद ज्ञापित किया जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया।

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जेएन मेडिकल कॉलेज, एएमयू में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया

अलीगढ़, 14 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग द्वारा सामुदायिक चिकित्सा विभाग के सहयोग से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सा संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद हबीब रजा मुख्य अतिथि और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. अमजद अली रिजवी विशिष्ट अतिथि रहे।

मुख्य अतिथि प्रो. मोहम्मद हबीब रजा ने अपने संबोधन में चिकित्सा शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया और साइकियाट्री क्लब की शुरुआत को एक सराहनीय कदम बताया, जो भावी चिकित्सकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाएगा। प्रो. अमजद अली रिजवी ने दोनों विभागों के संयुक्त प्रयासों की प्रशंसा की और छात्र जीवन में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासों को प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. फैसल शान के परिचयात्मक संबोधन से हुई, जिसके बाद विशेषज्ञ वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक स्थिरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिए।

सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. मोहम्मद सलमान शाह ने “आपदा के समय मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने में सामुदायिक स्थिरता की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने संकट की स्थिति में मानसिक प्रभाव को कम करने के लिए तैयारी और समन्वित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की महत्ता पर बल दिया।

मनोरोग विभाग के डॉ. जितेंद्र कुमार ने “आपदा के दौरान मानसिक स्वास्थ्य की खाई को पाटनाः एक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने आपात स्थितियों में शीघ्र हस्तक्षेप और मनोवैज्ञानिक सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद रियाजुद्दीन ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने की प्रासंगिकता पर जोर दिया, जिससे सहानुभूति, जागरूकता और सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहन मिले।

कार्यक्रम की विशेष आकर्षण साइकियाट्री क्लब का शुभारंभ था, जिसका उद्देश्य स्नातक छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और नेतृत्व की भावना विकसित करना है। यह क्लब चिकित्सा प्रशिक्षण के शुरुआती वर्षों से ही छात्रों में संवेदनशीलता और समझ विकसित करने की दिशा में कार्य करेगा।

कार्यक्रम का समापन प्रो. उजमा इरम (अध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा विभाग) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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एएमयू जेएनएमसी के शिक्षकों ने एआई आधारित चिकित्सा शिक्षा पर संगोष्ठी में प्रस्तुत किया शोधपत्र

अलीगढ़, 14 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फिजियोलॉजी और फार्माकोलॉजी विभागों के तीन शिक्षकों ने कर्नाटक के बेलगावी स्थित केएलई सेंचुरी कन्वेंशन सेंटर, जेएनएमसी कैंपस में आयोजित एसोसिएशन ऑफ फिजियोलॉजिस्ट्स एंड फार्माकोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (ऐपीकोन 2025) के 71वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में एक प्रभावशाली संगोष्ठी प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया।

संगोष्ठी का विषय “मेडिकल एजुकेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसः व्यक्तिगत सीखने के मार्ग” था  जिसमें चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की तेजी से बढ़ती भूमिका और छात्रों के लिए अनुकूलित सीखने की नई संभावनाओं पर चर्चा की गई।

फिजियोलॉजी विभाग के डॉ. अनवर हसन सिद्दीकी ने (“एआई आधारित व्यक्तिगत शिक्षणः छात्रों के अनुरूप सामग्री का अनुकूलन” विषय पर वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि एआई आधारित एडैप्टिव टूल्स छात्रों की व्यक्तिगत क्षमता और सीखने की शैली के अनुसार शैक्षणिक सामग्री तैयार कर सकते हैं।

फिजियोलॉजी विभाग के ही डॉ. अहमद फराज ने “एआई संचालित मूल्यांकन और फीडबैकः छात्र सहभागिता को बढ़ाना” विषय पर अपने विचार रखे और बताया कि एआई आधारित एनालिटिक्स के माध्यम से छात्रों के सतत मूल्यांकन, व्यक्तिगत फीडबैक और आत्म-निर्देशित अध्ययन को बेहतर बनाया जा सकता है।

फार्माकोलॉजी विभाग के डॉ. सैयद शारिक नईम ने “एआई आधारित शिक्षा में नैतिक विचारः निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए आवश्यक नैतिक, कानूनी और नियामक सुरक्षा उपायों पर बल दिया।

सम्मेलन के समापन सत्र में तीनों वक्ताओं को उनके उत्कृष्ट प्रस्तुतीकरण और विद्वत्तापूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद असलम ने शिक्षकों को बधाई दी और उनके राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक और चिकित्सा विमर्श को आगे बढ़ाने में किए गए योगदान की सराहना की।

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एएमयू वीमेन्स पॉलिटेक्निक में “सिंगल बोर्ड कंप्यूटर के साथ ऐज एआई” पर आमंत्रित व्याख्यान

अलीगढ़, 14 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की यूनिवर्सिटी वीमेंस पॉलिटेक्निक में “सिंगल बोर्ड कंप्यूटर के साथ एज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ऐज एआई)” विषय पर एक आमंत्रित व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य रास्पबेरी पाई जैसे सिंगल बोर्ड कंप्यूटर के माध्यम से एआई और मशीन लर्निंग के व्यावहारिक उपयोगों को समझना था।

कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल (यूके) के स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस के शोध साथी मिस्टर इसार अहमद और एएमयू के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की एम.टेक अंतिम वर्ष की छात्रा मिस मुनीबा रहमान ने बतौर रिसोर्स पर्सन भाग लिया। उन्होंने एआई के माध्यम से इमेज और वीडियो प्रोसेसिंग के व्यावहारिक प्रयोगों पर जानकारी दी और रास्पबेरी पाई हार्डवेयर पर हैंड्स-ऑन डेमो प्रस्तुत किए।

प्राचार्या डॉ. सलमा शाहीन ने अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों का स्वागत किया और विद्यार्थियों से सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुप्रयोग से जोड़ने का आग्रह किया। इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्युनिकेशन और कंप्यूटर इंजीनियरिंग डिप्लोमा के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और इस सत्र से लाभान्वित हुए।

कार्यक्रम की सफलता में योगदान के लिए डॉ. सलमा शाहीन (प्राचार्या), डॉ. शहनवाजुद्दीन (कन्वीनर), डॉ. शाहबाज हुसैन (को-कन्वीनर) और आयोजन समिति का विशेष योगदान रहा।

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एएमयू के प्रो. एम. जे. वारसी पंजाब के राज्यपाल द्वारा सम्मानित

अलीगढ़, 14 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भाषाविज्ञानी, भाषाविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष और लिंग्विस्टिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. एम. जे. वारसी को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में आयोजित 11वीं अखिल भारतीय भाषाविज्ञान एवं लोककथा सम्मेलन (एआईसीएलएफ) के दौरान पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया द्वारा सम्मानित किया गया।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रो. वारसी ने “राष्ट्र निर्माण में लोककथा, भाषा और शिक्षा की भूमिकाः नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने भाषा, संस्कृति और शिक्षा के बीच गहरे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक प्रगतिशील समाज के निर्माण में इन तीनों की निर्णायक भूमिका होती है।

शैक्षणिक ईमानदारी, प्रभावशाली अभिव्यक्ति और नवोन्मेषी शिक्षण के लिए प्रसिद्ध प्रो. वारसी ने भाषाविज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्हें जेम्स मैक्लियोड फैकल्टी अवॉर्ड (2012), कॉलिन पी. मासिका अवॉर्ड (2024) और एम. बी. इमेनो स्कॉलर ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड (2024) जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। प्रो. वारसी अकादमिक उत्कृष्टता के प्रतीक माने जाते हैं।

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विश्व हृदय दिवस पर एएमयू में अंतरविषयी कार्यशाला का आयोजन

अलीगढ़, 11 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रशासन विभाग ने कार्डियोलॉजी और एनेस्थिसियोलॉजी विभागों के सहयोग से विश्व हृदय दिवस के अवसर पर एक कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, निवारक उपायों और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर बल देना था।

मुख्य अतिथि पद्म भूषण डॉ. बी. के. राव, एमेरिटस कंसल्टेंट और सलाहकार, इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर एंड मेडिसिन, सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने भारत में बढ़ते हृदयाघात के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि हृदय रोग से होने वाली मृत्यु केवल व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हानि है। उन्होंने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य संयोग से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास से प्राप्त होता है। डॉ. राव ने उपस्थित लोगों से “स्वास्थ्य जागरूकता के दूत” के रूप में अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।

कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आसिफ हसन ने इस वर्ष के विश्व हृदय दिवस की थीम “डोन्ट मिस दि बीट” पर प्रकाश डालते हुए हृदय रोगों के प्रति जागरूकता और प्रारंभिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई। उन्होंने इस आयोजन में विभिन्न विभागों के सहयोग को एक नवाचारी कदम बताया।

इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. एम. अजहरुद्दीन मलिक ने बताया कि लगभग 96 प्रतिशत हृदयाघात शिक्षण, समय पर उपचार और नियमित व्यायाम से रोके जा सकते हैं। बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शाद अबकारी ने जन्मजात हृदय विकारों की चुनौतियों पर चर्चा की, जबकि डॉ. शाहना अली और डॉ. मनाजिर अथर ने सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र लिया और आपातकालीन स्थितियों में इसके महत्व पर जोर दिया।

व्यवसाय प्रशासन विभाग की अध्यक्ष प्रो. सलमा अहमद ने स्वागत भाषण में कहा कि “स्वास्थ्य केवल एक विषय या पेशे की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक साझा मानवीय उत्तरदायित्व है।” इसी अवसर पर डॉ. राव ने प्रो. सलमा अहमद की पुस्तक “केयर फाॅर हैल्थः ए फ्यूजन आॅफ कांटेक्ट अस” का लोकार्पण किया, जो स्वास्थ्य और कल्याण पर बहुआयामी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

प्रो. वलीद ए. अंसारी ने कहा कि नियमित शारीरिक गतिविधि और मानसिक सजगता न केवल हृदय को, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी सशक्त बनाती है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. आसिफ अली सैयद ने स्थायी जीवनशैली अपनाने के महत्व पर बल दिया।

उद्घाटन समारोह का संचालन शोधार्थी सानिया खान ने किया और धन्यवाद ज्ञापन रुश्दा कलीम ने प्रस्तुत किया। शोधार्थी अंबरीन शाकिर, तूबा बिलग्रामी, जिया रिजवी और सुमित तोमर सहित एमबीए छात्रों ने आयोजन में सहयोग किया।

कार्यशाला के समापन पर डॉक्टरों और शिक्षकों को कपड़े के थैले भेंट किए गए, जो स्थिरता, चिकित्सकों के प्रति सम्मान और हृदय स्वास्थ्य के संदेश का प्रतीक था।

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एएमयू की एमए लाइब्रेरी में ‘एएमयू ई-लाइब्रेरी’ पर ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

अलीगढ़, 14 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की मौलाना आजाद लाइब्रेरी द्वारा ‘एएमयू ई-लाइब्रेरी’ के नवसुधारित प्लेटफॉर्म को प्रस्तुत करने हेतु एक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्लेटफॉर्म विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी के कंप्यूटर एप्लिकेशन डिवीजन के सहयोग से विकसित किया गया है। इस तकनीकी प्रगति के साथ, एएमयू देश का पहला संस्थान बन गया है जिसने इतना नवीन और उन्नत डिजिटल लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म लागू किया है।

प्रशिक्षण सत्र का संचालन रीफ्रीड सोल्यूशंस प्रा. लि., नई दिल्ली की हेड ऑफ ऑपरेशन्स, वंशिका गौतम द्वारा किया गया। उन्होंने प्लेटफॉर्म की नई विशेषताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया, जिनमें उन्नत उपयोगकर्ता अनुभव, सब्सक्राइब्ड ई-संसाधनों तक सहज पहुंच, बेहतर सर्च विकल्प, एडवांस्ड एडमिन डैशबोर्ड और अपडेटेड एनालिटिक्स व रिपोर्टिंग क्षमताएं शामिल थीं।

यह प्लेटफॉर्म  https://amu.refread.com और एक समर्पित मोबाइल ऐप के माध्यम से सुलभ है। नवसुधारित एएमयू ई-लाइब्रेरी ज्ञान के विशाल भंडार तक एकीकृत डिजिटल प्रवेश द्वार प्रदान करती है, जिसमें ई-बुक्स, ई-जर्नल्स, वीडियो लेक्चर्स, शोध प्रबंध, थीसिस और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के व्याख्यान जैसी सामग्रियाँ शामिल हैं। यह एएमयू समुदाय की शैक्षणिक और शोध संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करती है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की केंद्रीय, विभागीय और कॉलेज स्तर की लाइब्रेरीज के पुस्तकालय पेशेवरों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को नवसुधारित प्लेटफॉर्म का प्रभावी ढंग से उपयोग कर उपयोगकर्ताओं को बेहतर सूचना सेवा प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

प्रारंभिक स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. निशात फातिमा ने कहा कि यह ई-लाइब्रेरी सिर्फ एक डिजिटल कैटलॉग नहीं, बल्कि एक समग्र 24×7 लर्निंग ईकोसिस्टम है, जो छात्रों और शिक्षकों को दूरस्थ रूप से लाखों संसाधनों तक पहुंच की सुविधा देती है और सतत शैक्षणिक जुड़ाव सुनिश्चित करती है।

धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मुनव्वर इकबाल, उप-पुस्तकालयाध्यक्ष ने प्रस्तुत किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. सैयद शाज हुसैन ने किया।

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