हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अदालत ने किया था मुक़दमे का प्रार्थना पत्र निरस्त
सीओ और दरोगा दे चुके थे अदालत को मुकद्दमा नहीं करने की रिपोर्ट
सहारनपुर । पुलिस ने दो पूर्व एमएलसी भाइयों और चार बेटों के खिलाफ मुकद्दमा कायम किया है । अदालत में पूर्व एमएलसी और इन बेटों के खिलाफ मुकदमे के लिए आवेदन किया गया था। दरोगा और सीओ ने अदालत को लिखकर दिया के मुकदमे की जरूरत नहीं है। थाने और सीओ की रिपोर्ट के आधार पर अदालत मुकद्दमा दर्ज करने का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया था। हैरत की बात ये है कि लेकिन फिर पुलिस ने आनन – फानन में चार साल पुराने मामले में मुकदमा दर्ज कर दिया।
23 जून को मिर्जापुर पोल के रहने वाले सुरेंद्र कुमार ने विशेष न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप लगाया था कि 2021 में वह जब अपने खेत पर गए तो उन्हें वहां से पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल, उनके भाई पूर्व एमएलसी महमूद और बेटों ने भगा दिया । मारपीट की और पांच हजार रुपए भी लूट लिए। आरोपियों ने उनसे कहा कि उन्होंने जमीन को खरीद लिया है । बाद में जब उन्होंने तहसील से पता किया तो मालूम चला कि पिता के फर्जी तरीके से दस्तखत कर जमीन का बैनामा करा लिया है ।
इस मामले में अदालत ने थाना मिर्जापुर से रिपोर्ट मांगी। मिर्जापुर के हलका इंचार्ज एसआई भूपेश शर्मा ने अदालत को रिपोर्ट दी। लिखा कि मामले में दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। इसलिए अब मुक़दमे की जरूरत नहीं है। इसी तरह ही सीओ मुनीश चंद्र ने भी अदालत को विस्तृत जांच के बाद लिखा कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। इसलिए मुक़दमे की आवश्यकता नहीं है।
उधर थाने और सीओ की रिपोर्ट आने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई की। अदालत में वादी के अधिवक्ता ने भी मुकद्दमा दर्ज नहीं करने को कहा। इसके बाद 7 जुलाई को अदालत ने मुक़दमे के आवेदन को निरस्त कर दिया।
हैरत की बात तो ये है कि इतना सब होने के बाद भी पुलिस ने अचानक 13 अगस्त को इस मामले ने पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल, उनके भाई पूर्व एमएलसी महमूद और उनके चार बेटों के खिलाफ गम्भीर धाराओं में मुकद्दमा दर्ज कर लिया।
पूर्व एमएलसी की पत्नी ने सीएम और चीफ जस्टिस से की शिकायत
इस मामले को लेकर पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल की पत्नी फरीदा बेगम ने मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को शिकायत भेजी है। इसमें बताया कि उसके परिवार के खिलाफ यह झूठा मामला दर्ज कराया गया है। चारों बेटों की जमानत उच्च न्यायालय से 12 अगस्त को मंजूर हो गई थी। 13 अगस्त को संबंधित थाने में जमानतियों को लेकर दस्तावेज पेश कर दिए गए, लेकिन पुलिस ने सत्यापन करने से इंकार कर दिया। इसके बाद यह फर्जी मामला दर्ज कर जेल के अंदर ही उनकी दोबारा से गिरफ्तारी दर्शा दी गई। उन पर एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया, जो गलत है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है
















