हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 22 मई : 2025
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मौजूदा बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ के जरिए सत्ता परिवर्तन की राह तैयार हो चुकी है।
बीजेपी पर गंभीर आरोप, नौजवानों और किसानों से किया विश्वासघात
अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी सरकार न नौजवानों को नौकरी दे सकी, न किसानों और मजदूरों को कोई राहत। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने 1,93,000 शिक्षक पदों की भर्ती का सिर्फ जुमला छोड़ा और ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। सपा प्रमुख ने एक अनुमान प्रस्तुत करते हुए कहा, “यदि प्रत्येक पद पर औसतन 75 अभ्यर्थी मानें, तो लगभग सवा करोड़ युवा इससे प्रभावित हुए हैं। इनके परिजनों को जोड़ें तो यह संख्या चार करोड़ से ज्यादा हो जाती है, और यही मतदाता 2027 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करेंगे।”
भ्रष्टाचार, महंगाई और भर्तियों की अनियमितता बनी जन आक्रोश का कारण
उन्होंने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार, महंगाई और सामाजिक अन्याय चरम पर है। पुलिस भर्ती समेत विभिन्न नौकरियों में अनियमितताओं ने पहले भी बीजेपी को नुकसान पहुंचाया है और अब यह राजनीतिक हकीकत बन गई है। उन्होंने भरोसा जताया कि “2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी दो अंकों में सिमट जाएगी।”
सपा प्रमुख ने आगे कहा कि “मजदूर, किसान, छात्र, व्यापारी, महिलाएं, कर्मचारी, शिक्षक, आशा बहनें, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, डिलीवरी ब्वॉय और छोटे दुकानदार सभी परेशान हैं। सरकार केवल अमीरों को फायदा पहुंचाने और ठेकेदारी में कमीशनखोरी करने में लगी है।”
“केवल उद्घाटन की सरकार” – अखिलेश का आरोप
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर समाजवादी सरकार की योजनाओं को ही दोबारा उद्घाटित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार ने खुद कोई नया काम नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि “अब बीजेपी उम्मीदवार जनता के बीच जाने से डर रहे हैं, क्योंकि उनके पास गिनाने लायक कुछ नहीं बचा है।”
पीडीए: भविष्य की राजनीति का नया मॉडल
सपा अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी की “सांप्रदायिक, भ्रष्ट और विभाजनकारी राजनीति” अब कमजोर पड़ चुकी है। इसके विपरीत समाजवादी पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) आधारित सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि “प्रदेश की 90% पीड़ित जनता अब जाग चुकी है और वह 2027 में पीडीए सरकार बनाने के लिए तैयार है।”
2024 में भी आज़माया गया था पीडीए मॉडल
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पीडीए गठजोड़ को चुनावी रणनीति का केंद्र बनाया था। पार्टी का उद्देश्य था बीजेपी की बहुसंख्यक वोट बैंक की रणनीति को सामाजिक न्याय आधारित वोट समूह से टकराना। यूपी में बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाली लंबे समय से राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है, जिसे लेकर समाजवादी पार्टी लगातार हमलावर रही है।
2027 के लिए सपा की हुंकार
अखिलेश यादव ने अपने बयान में स्पष्ट कर दिया कि समाजवादी पार्टी अब 2027 के चुनाव को लेकर मैदान में उतर चुकी है। उन्होंने कहा, “अब सब पीड़ित मिलकर देंगे जवाब, 2027 में बनाएंगे अपनी पीडीए सरकार। पीडीए ही भविष्य है।”
इस बयान के ज़रिए समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक ज़मीन तैयार करने का प्रयास किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस चुनौती का जवाब किस रणनीति से देती है।

















