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PoK में प्रदर्शनकारियों के आगे झुकी शहबाज की पार्टी, पहले आतंकी बताया अब देशभक्त कहा

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :

PoK में महीनों से जारी विरोध और हिंसा के बीच PML-N के रुख में बड़ा बदलाव, JAAC से बातचीत का ऐलान

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के रुख में बड़ा बदलाव सामने आया है। पार्टी ने अब प्रदर्शनकारियों को देशविरोधी या आतंकी बताने के बजाय उनमें से 99 प्रतिशत लोगों को देशभक्त बताया है। प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने शनिवार को कहा कि PML-N के नेता जल्द ही प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।

JAAC से बातचीत करेगी PML-N

राणा सनाउल्लाह ने एक रैली में कहा कि JAAC से जुड़े 99 प्रतिशत लोग देशभक्त भाई हैं। उन्होंने कहा कि यदि PML-N दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाती है तो JAAC के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विवाद सुलझाना सरकार की प्राथमिकता होगी। JAAC में छात्र, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले तक PML-N प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को सही ठहरा रही थी। पार्टी का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों के बीच प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के सदस्य मौजूद हैं। अब बातचीत की पेशकश को प्रदर्शन के बढ़ते दबाव के बीच राजनीतिक रणनीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

चुनाव के बीच बढ़ा राजनीतिक दबाव

PoK विधानसभा में 45 निर्वाचित सीटें हैं। चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके हैं और PML-N 25 सीटें जीतकर बहुमत के आंकड़े से आगे निकल चुकी है। उसका मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है, जो केंद्र में PML-N की गठबंधन सहयोगी है। तीसरे चरण में चार सीटों पर सोमवार को मतदान होना है, जबकि सात सीटों का चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है।

क्या चाहती है JAAC?

JAAC की प्रमुख मांग PoK की 12 विवादित शरणार्थी सीटों को समाप्त करना है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने और अपनी पसंद की सरकार बनाने के लिए किया जाता है। प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने भी चिंता जताई है।

JAAC का दावा है कि 27 जुलाई को चुनाव शुरू होने के बाद महिलाओं और बच्चों समेत 40 से अधिक लोग मारे गए। संगठन ने जून के पहले सप्ताह से अब तक 400 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का भी दावा किया है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने नागरिकों की मौत से इनकार करते हुए इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया बताया है।

7 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र ने भी PoK की सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताई और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई।

भारत का स्पष्ट रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।

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