हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़, 03 अक्टूबर 2025। जिलाधिकारी संजीव रंजन की अध्यक्षता में कलैक्ट्रेट सभागार में पराली प्रबंधन पर बैठक आयोजित हुई। डीएम ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं, मित्र कीट मर जाते हैं और धीरे-धीरे खेत बंजर होने लगते हैं। उन्होंने किसानों को चेतावनी दी कि पराली जलाने वालों पर अर्थदंड और मशीन जब्ती की कार्रवाई होगी।
डीएम ने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए सरकार तकनीकी सुविधाएं, बायोडिकम्पोजर और जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। सैटेलाइट से चिन्हित घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। गभाना और खैर क्षेत्र की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्होंने तहसीलदारों और लेखपालों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
उपनिदेशक कृषि अरुण कुमार चौधरी ने जानकारी दी कि जिले में 1,92,279 हेक्टेयर में धान की खेती होती है, जिनमें पराली जलाने की घटनाएं गभाना और खैर तहसीलों में अधिक होती हैं। किसानों को जागरूक करने के लिए होर्डिंग, पंपलेट, वाल पेंटिंग, यंत्र प्रदर्शन और गोष्ठियां कराई जा रही हैं।
कृषि वैज्ञानिक अनंत कुमार ने बताया कि दो एकड़ तक पराली जलाने पर 5 हजार, दो से पांच एकड़ पर 10 हजार और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में 30 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि पराली जलाने के बजाय उसे सड़ाकर मिट्टी में मिलाएं, जिससे प्राकृतिक खाद बने और उत्पादन बढ़े।













