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UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
जातिगत भेदभाव पर SC की सख्त टिप्पणी, केंद्र से जवाब और कमेटी गठन के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगाते हुए इसे लेकर कड़ी टिप्पणियां की हैं। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने कहा कि आज़ादी के 75 साल बाद भी देश जातिगत भेदभाव से जूझ रहा है और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भारत में अमेरिका जैसे हालात न बनें, जहां कभी अश्वेत और श्वेत छात्रों के लिए अलग-अलग स्कूल हुआ करते थे। कोर्ट का यह अंतरिम आदेश देशभर के विश्वविद्यालयों और छात्रों के लिए अहम माना जा रहा है।

नए नियमों की भाषा पर सवाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि यूजीसी के नए विनियमों की भाषा अस्पष्ट है। सीजेआई ने कहा कि नियमों की शब्दावली ऐसी है, जिससे दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है। ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा इसकी समीक्षा और संशोधन आवश्यक है। इसी आधार पर कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया।

‘अमेरिका जैसे हालात न बनें’
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 15(4) राज्य को अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है, लेकिन प्रगतिशील कानूनों में प्रतिगामी सोच नहीं होनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह का अलगाव समाज को पीछे ले जा सकता है।

केंद्र से जवाब और कमेटी का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही, सीजेआई ने सुझाव दिया कि कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति गठित की जाए, जो नियमों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करे कि समाज बिना किसी भेदभाव के साथ आगे बढ़ सके।

2012 के नियम लागू रहेंगे
अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक यूजीसी विनियम, 2012 ही लागू रहेंगे। गौरतलब है कि नए नियम 2012 के परामर्शात्मक प्रावधानों की जगह लेने के लिए अधिसूचित किए गए थे, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इन्हें सामान्य वर्ग के प्रति भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जहां केंद्र सरकार का रुख और समिति के गठन को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।

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