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जेएन मेडिकल कॉलेज के सर्जनों ने खतरनाक छाती की चोट से जूझ रहे किशोर की जान बचाई

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़, 7 अक्टूबर — अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) के कार्डियोथोरेसिक सर्जनों ने बुलंदशहर के 17 वर्षीय किशोर पर सफल आपातकालीन शल्यक्रिया कर उसे नई जिंदगी दी है। यह किशोर एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था और अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल से उसे जेएनएमसी रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने पर वह तीव्र श्वसन संकट से जूझ रहा था और वेंटिलेटर की आवश्यकता थी।

जांच में पता चला कि किशोर की छाती की हड्डी और पसलियों में विस्थापित फ्रैक्चर था, जिससे हृदय और मुख्य रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ रहा था — यह एक अत्यंत दुर्लभ और जीवन-घातक स्थिति थी। तत्काल सर्जिकल टीम ने आपातकालीन ओपन रिडक्शन और आंतरिक स्थिरीकरण ऑपरेशन किया, जिसमें टाइटेनियम प्लेट और स्क्रू का उपयोग कर छाती की दीवार को स्थिर किया गया और हृदय पर दबाव कम किया गया। समय पर उपचार के कारण मरीज की हालत तेजी से सुधरी और उसने पूर्ण रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया।

इस जीवनरक्षक सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में डॉ. मोहम्मद आजम हसीन, डॉ. सैयद शमायल रब्बानी, डॉ. आमिर मोहम्मद, तथा डॉ. मनाजिर अतहर शामिल रहे। एनेस्थेसिया टीम और नर्सिंग अधिकारियों — सुहैल, सिस्टर सुनी, नदीम और रिंकू — ने भी अहम भूमिका निभाई।

प्रोफेसर मोहम्मद आजम हसीन ने कहा कि समय पर रेफरल और टीमवर्क ने मरीज की जान बचाई। डॉ. रब्बानी ने बताया कि ऐसी जटिल शल्यक्रियाएं उत्तर भारत के बहुत कम सरकारी केंद्रों में की जाती हैं। डॉ. आमिर मोहम्मद ने कहा कि ये सेवाएं जेएनएमसी में बहुत कम खर्चे पर उपलब्ध हैं।

प्रो. हबीब रज़ा (डीन) और डॉ. अमजद अली रिज़वी (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट) ने टीम की सराहना की, जबकि कुलपति प्रो. नइमा खातून ने कहा कि यह उपलब्धि जेएनएमसी की उच्च गुणवत्ता और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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