हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
नई दिल्ली। संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। राजनेताओं के 75 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट के सवाल पर भागवत ने स्पष्ट कहा कि ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने साफ किया कि वे खुद भी रिटायर होने नहीं जा रहे हैं और न ही किसी और को इसके लिए कह रहे हैं। भागवत ने कहा, “मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं पद छोड़ दूंगा या कोई और संन्यास ले ले।”
उन्होंने आगे कहा कि काशी-मथुरा के आंदोलनों का समर्थन संघ नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से इसमें भाग ले सकते हैं, लेकिन संघ एक संगठन के तौर पर इसमें शामिल नहीं होगा। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हर जगह मंदिर ढूंढना आवश्यक नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन एक विशेष प्रसंग था, जिसे संघ ने समर्थन दिया था, लेकिन अब हर मामले में आंदोलन की जरूरत नहीं है।
आरक्षण के मुद्दे पर भी संघ प्रमुख ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संघ आरक्षण व्यवस्था को सही मानता है और इस संबंध में पहले ही सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर चुका है। उन्होंने यह भी दोहराया कि सामाजिक समरसता और न्याय की दृष्टि से आरक्षण आवश्यक है।
मोहन भागवत मोरोपंत पिंगले पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने श्रोताओं के लिखित सवालों के जवाब देते हुए संघ के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उनके बयानों से साफ हुआ कि संघ आने वाले समय में किसी नए धार्मिक आंदोलन का हिस्सा नहीं बनेगा, बल्कि समाजिक समरसता, संगठन और राष्ट्रीय विकास पर ही ध्यान केंद्रित करेगा।