हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
नई दिल्ली। छात्रों को बड़ी राहत देते हुए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने कॉलेजों में फीस वापसी की नई नीति जारी की है। अब किसी भी कॉलेज या कोर्स में एडमिशन लेने के बाद यदि छात्र बेहतर विकल्प मिलने पर अपना एडमिशन रद्द करते हैं, तो कॉलेज को पूरी फीस लौटानी होगी।
यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर 2026 तक एडमिशन रद्द करने पर संस्थान को पूरी फीस बिना किसी कटौती के लौटानी होगी। वहीं, यदि कोई छात्र 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 के बीच एडमिशन रद्द करता है, तो कॉलेज अधिकतम ₹1,000 प्रोसेसिंग फीस काट सकता है।
यदि किसी संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2026 के बाद भी जारी रहती है, तो उस पर यूजीसी की अक्टूबर 2018 की अधिसूचना के प्रावधान लागू होंगे। इस नीति का लाभ न केवल शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए, बल्कि आगे के सत्रों में भी लागू रहेगा जब तक इसे संशोधित नहीं किया जाता।
यूजीसी ने सभी सरकारी और निजी कॉलेजों को चेतावनी दी है कि यदि वे इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें संस्थान की मान्यता रद्द करना, नई ऑनलाइन या ओडीएल (ODL) कार्यक्रमों के लिए आवेदन अस्वीकार करना, या अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं।
इसके साथ ही आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि किसी भी कॉलेज को छात्रों के मूल दस्तावेज (original certificates) रोकने की अनुमति नहीं होगी। पहले इस तरह की शिकायतें आम थीं, जिससे छात्रों को दूसरे कॉलेजों में एडमिशन लेने में कठिनाई होती थी।
यूजीसी का यह कदम छात्रों के हितों की रक्षा करेगा और फीस वापसी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा। अब कॉलेजों की मनमानी पर अंकुश लगेगा और छात्रों को आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।














