हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ मंगलवार 27 मई 2025
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 2026 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को सेमीफाइनल माना जा रहा है। यही कारण है कि राज्य की सियासत अभी से गर्मा गई है। बीजेपी से लेकर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और छोटे दलों ने भी चुनावी रणभेरी बजा दी है। खास बात यह है कि इस बार सभी प्रमुख दल गठबंधन से दूरी बनाते हुए अकेले मैदान में उतरने का एलान कर रहे हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
लंबे समय से यूपी की सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस अब पंचायत चुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन दोबारा तैयार करने की कोशिश में जुटी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने साफ कहा है कि पार्टी पंचायत चुनाव में बिना किसी गठबंधन के अकेले मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में संगठन को पंचायत स्तर तक मजबूत किया जा रहा है और कार्यकर्ताओं को चुनाव में अवसर दिया जाएगा। कांग्रेस का फोकस स्थानीय नेतृत्व को उभारने और पंचायत स्तर पर पकड़ मजबूत करने पर है।
योगी सरकार में मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी पंचायत चुनाव में स्वतंत्र रूप से भाग लेगी। उनके बेटे डॉ. अरविंद राजभर ने भी वाराणसी में कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को टिकट देगी और किसी भी दल से गठबंधन नहीं किया जाएगा।
इसी तरह, निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मंत्री डॉ. संजय निषाद ने भी पंचायत चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला किया है। उनका कहना है कि पार्टी की जड़ें गांव-गांव में हैं और यह चुनाव उनकी पार्टी की राजनीतिक पहचान को और मजबूत करेगा।
समाजवादी पार्टी ने बूथ स्तर पर PDA (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) पंचायत शुरू कर दी है। पार्टी का मकसद हर पंचायत में जातिगत और सामाजिक समीकरणों के हिसाब से संगठन को मजबूत करना है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी भी दोबारा संगठन को सक्रिय करने के लिए रणनीति बना रही है, हालांकि उसने अभी तक अपने इरादों का खुलकर ऐलान नहीं किया है।
उत्तर प्रदेश में कुल 57,691 ग्राम पंचायतें, 826 ब्लॉक पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी-फरवरी 2026 में पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना है। इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। हाल ही में ई-टेंडर के जरिए मतपेटियों की खरीद प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 का पंचायत चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव का ट्रायल रन होगा। यह सभी दलों के लिए न केवल अपनी ताकत आजमाने का मौका होगा बल्कि आगामी चुनावों के लिए संगठनात्मक स्थिति को जांचने का भी जरिया बनेगा।















