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लखनऊ: फर्जी लेटर पैड और हस्ताक्षर से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिश, पार्षद की शिकायत पर FIR दर्ज

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 23 मई : 2025

लखनऊ, 23 मई 2025: राजधानी लखनऊ में फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है। महानगर वार्ड से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षद हरिश्चंद्र लोधी के फर्जी लेटर पैड और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर एक महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिश की गई। मामले का खुलासा होते ही नगर निगम के ज़ोन-3 के जोनल अधिकारी अमरजीत सिंह ने अलीगंज थाने में इसकी विधिवत शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम एक कर्मचारी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया के तहत ओटीपी लेने के लिए जोनल अधिकारी के पास पहुँचा। इसी दौरान जब अधिकारी ने दस्तावेज़ों की जाँच की, तो पाया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा था, उन पर उनके हस्ताक्षर ही नहीं थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर अधीक्षक से भी पूछताछ की गई, जिन्होंने भी इन दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

जिस महिला के नाम पर मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिश की जा रही थी, उसकी पहचान निर्मला शुक्ला के रूप में हुई है। रिकॉर्ड के अनुसार, निर्मला शुक्ला की मृत्यु 20 मई 2021 को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (PGI) में हुई थी। इसके बावजूद, प्रमाणपत्र के लिए आवेदन महानगर के सेक्टर-बी स्थित उनके कथित घर का हवाला देकर किया गया था।

फर्जी दस्तावेजों का मामला सामने आते ही नगर निगम प्रशासन ने तुरंत मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को रोक दिया और संबंधित कर्मचारी को सेवा से निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि मृत्यु अस्पताल में हुई है, तो मृत्यु प्रमाणपत्र वहीं से जारी किया जाना चाहिए, नगर निगम से नहीं।

मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर चार साल बाद अचानक मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की ज़रूरत क्यों पड़ी? यह बिंदु संदेह को और गहरा कर रहा है और पुलिस की जांच का केंद्र बना हुआ है।

अलीगंज थाने की पुलिस ने पार्षद हरिश्चंद्र लोधी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और सभी पहलुओं पर गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे षड्यंत्र में कौन-कौन शामिल था और इसके पीछे किसका हित छिपा हुआ है।

इस घटना ने नगर निगम की प्रक्रियाओं और दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते अधिकारी सजग न होते, तो एक गंभीर फर्जीवाड़ा सफल हो सकता था।

नगर निगम प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए दस्तावेज़ों की जांच प्रक्रिया और अधिक सख्त की जाएगी।

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