हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ रविवार 1 जून 2025
अलीगढ़। जिन बच्चों को अब तक खसरा-रुबेला (एमआर) का टीका नहीं लगाया गया है, उनकी जान को गंभीर खतरा बना हुआ है। इन बच्चों को तमाम जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक जून से 30 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान में अलीगढ़ सहित प्रदेश के 12 जिलों के 205 ब्लॉकों को प्राथमिकता दी गई है, जहां टीकाकरण का स्तर 95 फीसदी से कम पाया गया है।
विशेष रूप से अलीगढ़ जिले में एमआर-1 और एमआर-2 दोनों ही टीकों के स्तर को बढ़ाने के लिए व्यापक रणनीति बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक-एक बच्चे की निगरानी करते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।
अब तक कई बच्चे टीकाकरण से छूटे
सामान्यतः खसरा-रुबेला का पहला टीका (एमआर-1) बच्चे के नौ माह पूरे होने पर और दूसरा टीका (एमआर-2) 16 माह की आयु में लगाया जाना चाहिए। लेकिन कई जिलों में टीकाकरण प्रभावित हुआ है। इसी के मद्देनज़र अब पांच वर्ष तक के उन सभी बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा, जो अब तक छूटे हुए हैं।
पहले भी चले अभियान, मिले अच्छे परिणाम
नवंबर-दिसंबर 2024 में हुए अभियान में 305 ब्लॉकों में 2.36 लाख बच्चों को टीका लगाया गया था। इसके बाद अप्रैल 2025 में हुए हेड काउंट सर्वे आधारित अभियान में 1.36 लाख बच्चों का टीकाकरण किया गया। अब 20 मई 2025 तक की रिपोर्ट के आधार पर इस नए विशेष अभियान की शुरुआत की गई है।
इन जिलों में होगा विशेष फोकस
टीकाकरण की कम दर को देखते हुए अलीगढ़ के साथ जिन अन्य जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, वे हैं: ललितपुर, जालौन, कानपुर देहात, कानपुर नगर, हमीरपुर, शामली, मथुरा, आजमगढ़, मेरठ, बांदा और सोनभद्र। एमआर-2 खुराक की दृष्टि से 25 जिलों के 321 ब्लॉकों की निगरानी की जा रही है।
संक्रमण की दर में उत्तर प्रदेश सबसे आगे
प्रदेश में खसरा संक्रमण की दर प्रति लाख जनसंख्या पर मात्र 0.003 प्रतिशत रही है, जो अन्य राज्यों जैसे कि छत्तीसगढ़ (0.009%), मध्य प्रदेश (0.006%) और आंध्र प्रदेश (0.005%) से कहीं बेहतर है।
खसरा-रुबेला टीका क्यों जरूरी है?
केजीएमयू के बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. संजीव कुमार वर्मा के अनुसार, “खसरा और रुबेला दोनों ही वायरस से होने वाली गंभीर बीमारियाँ हैं, जो बच्चों की जान के लिए खतरा बन सकती हैं। समय पर टीकाकरण से बच्चों को निमोनिया, विटामिन ए की कमी, कान-नाक-गले का संक्रमण, खूनी पेचिश, और मस्तिष्क रोग जैसी गंभीर समस्याओं से बचाया जा सकता है।”
रुबेला के कारण जन्मजात विकृति, मानसिक मंदता और अन्य दीर्घकालिक समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि सभी बच्चों को समय पर एमआर टीका लगा दिया जाए, तो बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट लाई जा सकती है।















