हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:17 जुलाई 2025
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। यह स्वतंत्रता के बाद देश की पांचवीं जनगणना होगी, जबकि कुल मिलाकर 15वीं बार देश में जनगणना की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है, क्योंकि इसमें पहली बार जाति आधारित गणना भी की जाएगी।
जनशक्ति और समय-सारणी
सरकार ने इस महा-अभियान के लिए करीब 6 लाख कर्मचारियों की तैनाती का खाका तैयार किया है। इनमें 5 लाख प्रगणक, 54,000 सुपरवाइजर और 12,000 अधिकारी शामिल होंगे। इन सभी को चरणबद्ध प्रशिक्षण देने की योजना है ताकि आंकड़े एकत्र करने में कोई त्रुटि न हो।
हाउस लिस्टिंग सर्वे 2026 में
जनगणना की पूर्व तैयारी के तहत हाउस लिस्टिंग सर्वे का कार्य मई-जून 2026 के बीच संपन्न कराया जाएगा। इस सर्वे में मकानों की संख्या, उनकी प्रकृति, सुविधाएं, और परिवारों की संरचना का विस्तृत डाटा इकट्ठा किया जाएगा। यह डाटा 2027 की मुख्य जनगणना के लिए आधार बनेगा।
मुख्य जनगणना फरवरी 2027 में
मुख्य जनगणना की प्रक्रिया 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगी। इस दौरान प्रत्येक घर तक पहुंचकर जनसंख्या, आयु, शिक्षा, लिंग, रोजगार, और पहली बार जाति का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। सरकार का मानना है कि जाति आधारित आंकड़े सामाजिक योजनाओं के लक्ष्य निर्धारण और संसाधनों के वितरण में मददगार होंगे।
डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल
इस बार जनगणना में डिजिटल उपकरणों और मोबाइल एप्स का भी व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे डाटा संग्रहण अधिक सटीक और पारदर्शी होगा।
राज्य सरकार का दावा है कि 2027 की यह जनगणना न सिर्फ जनसंख्या का सही अनुमान देगी, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक असमानताओं को दूर करने की नीति-निर्धारण में भी मील का पत्थर साबित होगी।