हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
दिल्ली के लाल किला के पास हुए कार धमाके में जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। फोरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी है कि विस्फोट में मारा गया व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों में शामिल डॉक्टर उमर मोहम्मद था। धमाका इतना भीषण था कि कार में सवार व्यक्ति के शरीर के टुकड़े पूरी तरह जल गए थे और शुरुआती पहचान नामुमकिन हो गई थी।
मां के सैंपल से हुआ डीएनए मैच
पुलिस के अनुसार, ब्लास्ट साइट से मिले जैविक अवशेषों का डीएनए, उमर मोहम्मद की मां से लिए गए सैंपल से पूरी तरह मेल खा गया। पुलवामा से लिए गए सैंपल को दिल्ली लाकर जांच की गई। इस डीएनए मिलान के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि कार में मौजूद व्यक्ति वही था।
कान के मैल से भी मिल सकता है डीएनए
इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या कान का मैल भी पहचान का आधार बन सकता है? फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, Earwax में मौजूद कोशिकाओं से न्यूक्लियर और माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए दोनों निकाले जा सकते हैं। सुरक्षित संग्रहण, निष्कर्षण और STR प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया से इसकी जांच संभव है। शोध बताते हैं कि कान के मैल से डीएनए पहचान की सफलता दर करीब 80% तक हो सकती है, हालांकि यह नमूने की गुणवत्ता और उम्र पर निर्भर करती है।
डीएनए के अन्य स्रोत
ऐसे गंभीर मामलों में, जहां अवशेष जल जाते हैं, जांच एजेंसियां अस्थि, दांत, नाखून, रक्त, लार, त्वचा के स्वैब और बालों की जड़ों जैसे विश्वसनीय स्रोतों का सहारा लेती हैं।
डॉ. उमर मोहम्मद की पहचान से साबित होता है कि डीएनए तकनीक कितनी उन्नत और भरोसेमंद बन चुकी है, जो अब कान के मैल जैसे सूक्ष्म स्रोतों से भी पहचान संभव बना सकती है।













