बुधवार को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे,
हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
मकर संक्रांति का पावन पर्व इस वर्ष बुधवार, 14 जनवरी को विशेष ज्योतिषीय संयोगों के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही तितिला एकादशी का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिससे इस संक्रांति का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। तिथि को लेकर फैले भ्रम को दूर करते हुए ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत ने बताया कि संक्रांति का पूजन और व्रत 14 जनवरी को करना श्रेष्ठ रहेगा, जबकि खिचड़ी का दान 15 जनवरी को शास्त्र सम्मत माना गया है।
विशेष पुण्यकाल का महत्व
ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। इसी समय से विशेष पुण्यकाल प्रारंभ होकर शाम 5:41 बजे तक रहेगा। इस अवधि में सूर्य पूजन, तिल-गुड़ का दान तथा भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी गई है।
एकादशी के कारण बदला दान का नियम
प्रेरणा ज्योतिष अनुसंधान के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बताया कि 14 जनवरी को एकादशी तिथि शाम 5:53 बजे तक रहेगी। एकादशी होने के कारण इस दिन चावल और खिचड़ी का सेवन व दान वर्जित रहेगा। ऐसे में श्रद्धालु संध्या के बाद अन्य दान कर सकते हैं, लेकिन खिचड़ी का दान 15 जनवरी की सुबह करना अधिक उचित होगा। ज्योतिष अन्वेषक अमित गुप्ता ने भी इसी परंपरा का पालन करने की सलाह दी है।
गुरुवार को दान के शुभ मुहूर्त
15 जनवरी, गुरुवार को प्रातः 7:15 बजे से 8:34 बजे तक दान का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं लाभामृत मुहूर्त दोपहर 12:30 बजे से 3:08 बजे तक माना गया है।
सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग
ज्योतिषाचार्य रुचि कपूर के अनुसार 14 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। इसी दिन खरमास की समाप्ति होगी, जिसके बाद विवाह और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत हो सकेगी।
पर्व का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य एक माह में एक राशि में गोचर करते हैं। जब सूर्य एक राशि से दूसरी में प्रवेश करते हैं, तो उसे संक्रांति कहा जाता है। वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं, जिनमें मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने से दिन बड़े होने लगते हैं, जिसे सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है।













