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बजट 2026: क्या सोना-चांदी और मेटल्स पर घटेगी ड्यूटी? रिफाइनिंग सेक्टर को बड़ी राहत की उम्मीद

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

घरेलू रिफाइनर्स की मांग: ड्यूटी में बराबरी जरूरी
देश के कीमती धातु (सोना-चांदी) रिफाइनिंग सेक्टर की नजरें बजट 2026 पर टिकी हैं। प्रमुख रिफाइनिंग कंपनी MMTC-PAMP ने सरकार से मांग की है कि घरेलू रिफाइनर्स और आयातित तैयार बुलियन (सोना-चांदी) के बीच ड्यूटी में समानता लाई जाए। कंपनी का कहना है कि मौजूदा ड्यूटी असमानता के कारण भारतीय रिफाइनर्स को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे निवेश और क्षमता विस्तार प्रभावित हो रहा है।

MMTC-PAMP तक सीमित नहीं है समस्या
MMTC-PAMP के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ समीत गुहा के अनुसार यह चुनौती केवल उनकी कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा प्रेशियस मेटल रिफाइनिंग सेक्टर लंबे समय से इस असमानता से जूझ रहा है। खासकर SEPA रूट के जरिए कच्चे सोने-चांदी (डोरे) के आयात और तैयार बुलियन के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में अंतर घरेलू रिफाइनर्स को कमजोर स्थिति में डाल देता है। कई बार विदेशी कंपनियों से आने वाला तैयार बुलियन सस्ता पड़ता है, जिससे भारतीय रिफाइनर्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता घटती है।

FTA और भविष्य की चिंताएं
समीत गुहा ने बताया कि SEPA के बाद जिन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) पर हस्ताक्षर हुए हैं, उनमें बुलियन को कम ड्यूटी वाले दायरे से बाहर रखा गया है। इंडस्ट्री चाहती है कि भविष्य में होने वाले समझौतों में भी सोना और चांदी को ऐसी छूट न दी जाए, ताकि घरेलू उद्योग को संरक्षण मिल सके और स्थानीय रिफाइनिंग को बढ़ावा मिले।

LBMA मान्यता और भारत का वैश्विक लक्ष्य
गुहा का कहना है कि अगर भारत को रिफाइनिंग के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है और अधिक LBMA (लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन) मान्यता प्राप्त रिफाइनर्स तैयार करने हैं, तो सरकार को इनपुट से जुड़े लाभ देने होंगे। यह लाभ ड्यूटी डिफरेंशियल बढ़ाकर या नीति में बदलाव के जरिए दिया जा सकता है, जिससे निवेश, रिटर्न और तकनीकी क्षमता में सुधार संभव होगा।

मौजूदा ड्यूटी स्ट्रक्चर और आयात आंकड़े
वर्तमान में सोना और चांदी के डोरे पर 6% ड्यूटी लगती है, जबकि रिफाइनर्स को 0.65% का डिफरेंशियल मिलता है, जिससे प्रभावी ड्यूटी 5.35% रह जाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में MMTC-PAMP ने करीब 40 टन सोना और 50 टन चांदी आयात की थी। वहीं चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर में 36 टन सोना और 60 टन चांदी का आयात हुआ, जो चांदी की मजबूत मांग को दर्शाता है।
उद्योग को उम्मीद है कि बजट 2026 में यदि सरकार ड्यूटी असमानता दूर करती है, तो भारत वैश्विक रिफाइनिंग हब बनने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा सकेगा।

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