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किताबों से आगे बढ़कर अब BIIT में लग रही AI की क्लास: तकनीक साधन बने , बोझ नहीं

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

बदलती शिक्षा में तकनीक की असली परीक्षा

नई दिशा की ओर बढ़ती भारतीय शिक्षा प्रणाली
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रहा है। बिट ग्रुप ऑफ एजूकेशन के एमडी मनीष शर्मा के अनुसार, एआई शिक्षा को गति और लचीलापन प्रदान कर सकता है, लेकिन यह जरूरी है कि इसे बोझ के बजाय एक उपयोगी साधन के रूप में अपनाया जाए। आने वाले समय में एआई भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

एनईपी 2020 और एआई का समावेश
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शिक्षा में तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। सीबीएसई ने 2026 से तीसरी कक्षा से ही एआई की पढ़ाई शुरू करने की योजना बनाई है, ताकि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही डिजिटल दुनिया के लिए तैयार किया जा सके। यूनेस्को की रिपोर्ट भी इस दिशा में भारत के प्रयासों को महत्वपूर्ण मानती है, बशर्ते स्पष्ट नीतियां और ढांचा तैयार किया जाए।

छात्रों को मिलेगा व्यक्तिगत सीखने का अनुभव
एआई की मदद से शिक्षा अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी बन सकती है। अब हर छात्र अपनी गति, रुचि और जरूरत के अनुसार पढ़ाई कर सकेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी छात्र को गणित में कठिनाई है और दूसरे को अंग्रेजी में, तो एआई दोनों के लिए अलग-अलग अभ्यास और समाधान तैयार कर सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी मोबाइल के जरिए व्यक्तिगत कोचिंग प्राप्त कर सकेंगे।

शिक्षकों के काम में आएगी आसानी
एआई क्विज तैयार करने, असाइनमेंट जांचने और फीडबैक देने जैसे कार्यों को आसान बना सकता है। इससे शिक्षकों का समय बचेगा और वे छात्रों के साथ अधिक संवाद, मार्गदर्शन और भावनात्मक सहयोग पर ध्यान दे सकेंगे। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम और ओईसीडी की रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई शिक्षकों की कई जटिल जिम्मेदारियों को कम कर सकता है।

सरकार की पहल: ‘युवा एआई फॉर ऑल’
हाल ही में भारत सरकार ने ‘युवा एआई फॉर ऑल’ कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य युवाओं को एआई के मूल सिद्धांत, नैतिकता और उपयोग से परिचित कराना है। यह पहल छात्रों को भविष्य के तकनीकी और रोजगार बाजार के लिए तैयार करने में मदद करेगी।

एआई के फायदे और संभावनाएं
एआई छात्रों को डिजिटल कौशल, नवाचार और तकनीकी समझ विकसित करने में मदद करता है। यह विशेष रूप से उन छात्रों के लिए उपयोगी है, जिन्हें भाषा या सीखने में कठिनाई होती है, क्योंकि एआई स्पीच-टू-टेक्स्ट, अनुवाद और व्यक्तिगत ट्यूटोरियल जैसी सुविधाएं प्रदान करता है।

चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि एआई के कई फायदे हैं, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। छात्रों के डेटा की सुरक्षा और निजता एक बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा, एआई मानवीय भावनाओं, प्रेरणा और गहरे संवाद का विकल्प नहीं बन सकता। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शिक्षकों की भूमिका बदल सकती है, लेकिन उनका महत्व खत्म नहीं होगा।

संतुलन है जरूरी
एआई भारतीय शिक्षा को अधिक समान, आधुनिक और छात्र-केंद्रित बना सकता है, लेकिन इसके उपयोग में संतुलन और सावधानी जरूरी है। सही दिशा में उपयोग होने पर यह तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

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