हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
ललितपुर में 4 माह की जांच के बाद बड़ी कार्रवाई
ललितपुर जनपद में महिला पुलिसकर्मी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, धमकी देने और भ्रष्टाचार में संलिप्तता के गंभीर आरोपों में मुख्य आरक्षी जितेन्द्र यादव को उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा से पदच्युत (डिसमिस) कर दिया गया। यह कार्रवाई 24 मार्च 2026 को की गई। पूरे मामले की जांच करीब चार महीने तक चली, जिसमें आरोपी को दोषी पाया गया।
मोबाइल बदलकर करता था उत्पीड़न, दी जान से मारने की धमकी
जांच में सामने आया कि वर्ष 2025 में प्रधान लिपिक शाखा, जनपद ललितपुर में तैनाती के दौरान मुख्य आरक्षी जितेन्द्र ने अवकाश पत्रावलियों के निस्तारण के नाम पर पुलिसकर्मियों से अवैध धन की मांग की। इसकी जानकारी एक महिला सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) को होने पर आरोपी ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से उसे बार-बार फोन कर मानसिक उत्पीड़न किया और जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, महिला कर्मी की छवि धूमिल करने के लिए अफवाहें भी फैलाई गईं।
विभागीय जांच में दोषी, नियमों के तहत हुई कार्रवाई
प्रारंभिक जांच अपर पुलिस अधीक्षक, ललितपुर को सौंपी गई थी। आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर प्रकरण को विभागीय कार्रवाई के लिए अग्रसारित किया गया। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), झांसी द्वारा निष्पक्ष जांच की गई, जिसमें मुख्य आरक्षी को दोषी करार दिया गया। इसी आधार पर दंड एवं अपील नियमावली-1991 के तहत कार्रवाई करते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
रिकॉर्डिंग कर करता था ब्लैकमेल, जमीन कब्जाने के भी आरोप
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी पुलिसकर्मियों की सामान्य बातचीत को कार्यालय के अंदर और बाहर रिकॉर्ड करता था और बाद में उनका दुरुपयोग कर दबाव बनाता था। इसके अलावा, अपराधियों के साथ मिलकर विवादित जमीनों पर कब्जा करने, वाहन खरीदने और षड़यंत्र रचने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। आरोपी पर यह भी आरोप है कि वह कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए आत्महत्या जैसे स्टेटस लगाने को उकसाता था।
सोशल मीडिया पर लगाए बेबुनियाद आरोप
अपने खिलाफ हो रही कार्रवाई से बचने के लिए मुख्य आरक्षी ने सोशल मीडिया के माध्यम से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर झूठे और निराधार आरोप भी लगाए। हालांकि जांच में ये सभी आरोप असत्य पाए गए।
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