हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
एएमयू में फिजियोलॉजी और फार्माकोलॉजी के एकीकरण पर यूपी-एपीपीआईसीओाएन 2026 का आयोजन
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी और फिजियोलॉजी विभाग द्वारा 3 और 4 अप्रैल को “इंटीग्रेटिंग फिजियोलॉजी एंड फार्माकोलॉजी” विषय पर यूपी-एपीपीआईसीओाएन 2026 का आयोजन किया जा रहा है।
इस सम्मेलन में प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया (एडीआर) रिपोर्टिंग के 37 वर्षों (1989-2026) की उपलब्धि पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान तथा क्लिनिकल प्रैक्टिस में अंतर्विषयी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।
दो दिवसीय इस शैक्षणिक कार्यक्रम में 37 विशेषज्ञ व्याख्यान, चार प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशालाएँ तथा 110 से अधिक पोस्टर और मौखिक प्रस्तुतियाँ ऑफलाइन और वर्चुअल दोनों माध्यमों से आयोजित की जाएँगी। कार्यक्रम के दौरान प्रो. एम. नसीरुद्दीन बेस्ट पोस्टर अवॉर्ड और प्रो. के.सी. सिंघल बेस्ट ओरल अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे, साथ ही चार लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिए जाएंगे। इस कार्यक्रम को यूपीएमसी द्वारा छह सीएमई घंटों की मान्यता प्रदान की गई है।
एएमयू की कुलपति प्रो. नइमा खातून इस सम्मेलन की मुख्य संरक्षक हैं, जबकि चिकित्सा संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद खालिद और जेएनएमसी के प्रिंसिपल एवं सीएमएस प्रो. अंजुम परवेज संरक्षक हैं।
सम्मेलन का नेतृत्व एपीपीआई यूपी-यूके की अध्यक्ष प्रो. मनीषा जिंदल, आयोजन अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद असलम, आयोजन सचिव प्रो. सैयद जियाउर रहमान तथा संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. तनुज माथुर कर रहे हैं।
यह कार्यक्रम देश के प्रमुख शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को एक मंच पर लाकर संवाद और नवाचार को बढ़ावा देगा, जिससे चिकित्सा शिक्षा और रोगी देखभाल को सुदृढ़ किया जा सकेगा।
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एएमयू ने अलीगढ़ मंडल में जल जीवन मिशन पर प्रभाव अध्ययन शुरू किया
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भारत सरकार की “हर घर जल” पहल के सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का आकलन करने के लिए जल जीवन मिशन (जेजेएम) का एक व्यापक प्रभाव अध्ययन प्रारंभ किया है।
इस अध्ययन का उद्देश्य फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन्स (एफएचटीसी) के माध्यम से सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से हुए बदलाव का विश्लेषण, विशेष रूप से अलीगढ़ मंडल के गांवों में जीवन की गुणवत्ता पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन करना है।
मैदानी कार्य का पहला चरण धनीपुर ब्लॉक के भोजपुर गांव से शुरू हुआ, जिसके लिए जिला परियोजना प्रबंधन इकाई और उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई, ताकि प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
शोध दल में प्रो. नसीम अहमद खान, डॉ. मोहम्मद ताहिर, डॉ. कुर्रतुल ऐन अली, डॉ. मोहम्मद आरिफ खान, डॉ. शायना सैफ, डॉ. अंदलीब, डॉ. मोहम्मद उजैर, डॉ. समीरा खानम और डॉ. अनम आफताब शामिल हैं। इनके साथ शोध सहायक डॉ. ताहा फातिमा और मोहम्मद समीर खान तथा फील्ड अन्वेषक मोहम्मद बिलाल खान, हमजा अली, मुजफ्फर हाशमी, अब्दुल हन्नान, माज फारूक और मोहम्मद मोहसिन भी कार्य कर रहे हैं।
यह अध्ययन बहुआयामी पद्धति पर आधारित है, जिसमें गृह सर्वेक्षण, विशेष रूप से महिलाओं के साथ समूह चर्चा (फोकस ग्रुप डिस्कशन) तथा ग्राम प्रधानों, आशा कार्यकर्ताओं और विद्यालय अधिकारियों जैसे स्थानीय हितधारकों के साथ साक्षात्कार शामिल हैं।
इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, विशेष रूप से जलजनित रोगों में कमी, तथा सामाजिक परिणामों जैसे जल संग्रहण में लगने वाले समय में कमी के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण का आकलन करना है। अध्ययन में अवसंरचना की स्थिरता, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के कार्य और जल गुणवत्ता निगरानी तंत्र का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
अलीगढ़ के बाद इस परियोजना को हाथरस, कासगंज और एटा जिलों तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने और सुरक्षित पेयजल की समान पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण फीडबैक प्राप्त होगा।
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जेएन मेडीकल कालिज में क्विज प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा विश्व क्षय रोग दिवस कार्यक्रमों की श्रृंखला के अवसर पर स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स में तपेदिक (टीबी) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और व्यावहारिक ज्ञान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गयी।
प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई, जिसमें प्रारंभिक दौर में 13 टीमों ने भाग लिया, जिनमें से पाँच टीमों ने फाइनल राउंड के लिए क्वालीफाई किया। ग्रैंड फिनाले में बहुविकल्पीय प्रश्न (एमसीक्यू), बजर राउंड, विजुअल मिस्ट्री और रैपिड-फायर राउंड शामिल थे, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों के ज्ञान का परीक्षण टीबी की महामारी विज्ञान, निदान, उपचार और राष्ट्रीय कार्यक्रमों से संबंधित विषयों पर किया गया।
क्विज का संचालन डॉ. मोहम्मद यासिर जुबैर, डॉ. सैयद सोहैब हाशमी और डॉ. सूर्य प्रकाश रेड्डी पेराम ने किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुबाह दिलशाद ने किया। इस आयोजन में प्रतिभागियों के साथ-साथ दर्शकों की भी उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।
“निक्षय निंजाज” टीम, जिसमें डॉ. रोहन कौशिक और डॉ. शाहलनास करमकुंडिल शामिल थे, ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि “माइको बस्टर्स” टीम, जिसमें डॉ. आयुषी गुप्ता और डॉ. सी.के. प्रभाकरण शामिल थे, उपविजेता रही।
विजेताओं को विभागाध्यक्ष प्रो. उजमा इरम और डॉ. समीना अहमद द्वारा सम्मानित किया गया। उन्होंने टीबी उन्मूलन के महत्व और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. दानिश कमाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर शिक्षकों की उपस्थिति रही।
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जेएन मेडीकल कालिज के डॉक्टर को वयस्क टीकाकरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन में तृतीय पुरस्कार मिला
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. सैयद सोहैब हाशमी ने लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित आईएसएआईसीओएन-2026, भारतीय वयस्क टीकाकरण सोसाइटी के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘ओवरऑल ओरल प्रेजेंटेशन’ श्रेणी में तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया।
डॉ. हाशमी ने “एचआईवी वैक्सीन विकास में बाधाएँ और चुनौतियाँः एक स्कोपिंग रिव्यू” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया, जिसे उसकी वैज्ञानिक गहनता, व्यवस्थित पद्धति और समकालीन जनस्वास्थ्य प्राथमिकताओं से प्रासंगिकता के लिए सराहा गया। इस अध्ययन में एचआईवी वैक्सीन विकास से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों, जैसे जैविक जटिलताएँ, क्लिनिकल ट्रायल की सीमाएँ और कार्यान्वयन संबंधी समस्याओं को रेखांकित किया गया।
“इम्यूनाइजेशन फॉर लाइफः एडवांसिंग एडल्ट एंड लाइफ-कोर्स वैक्सीनेशन इन इंडिया” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने भाग लिया और वयस्क टीकाकरण रणनीतियों को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।
डॉ. हाशमी को बधाई देते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. उजमा इरम ने उनकी उपलब्धि की सराहना की और अनुसंधान तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सराहा।
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इंटेलिब 2026 का समापन, विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में “इमर्जिंग ट्रेंड्स इन लाइब्रेरिज” पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईएनटीईएलएलआईबी-2026) का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ, जो प्रौद्योगिकी-आधारित विश्व में पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर केंद्रित दो दिवसीय वैश्विक शैक्षणिक आयोजन का समापन था।
इस सम्मेलन में विश्व भर से विद्वानों, पेशेवरों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में उभरते रुझानों, नवाचारों और भविष्य की दिशाओं पर विचार-विमर्श किया।
वैलेडिक्टरी सत्र में एएमयू सहकुलपति, प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने डिजिटल युग में पुस्तकालयों की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला और पुस्तकालय शिक्षा एवं सेवाओं में निरंतर नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि एयर वाइस मार्शल (डॉ.) देवेश वत्स, सलाहकार, साइबर सुरक्षा एवं क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज, डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएससीआई), ने पुस्तकालय प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए डेटा सुरक्षा और डिजिटल तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पुरस्कार वितरण समारोह रहा, जिसमें विशिष्ट पेशेवरों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। प्रो. एस. मुस्तफा के. क्यू. जैदी और प्रो. प्रीति महाजन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2026 प्रदान किया गया, जबकि एएमयू के उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. मोनावर इकबाल को बेस्ट लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन प्रोफेशनल अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया।
अन्य पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में डॉ. राजेश कुमार (बेस्ट एकेडमिक लाइब्रेरियन), डॉ. मोहम्मद नाजिम (बेस्ट यंग एलआईएस टीचर), शम्सु जमान खान (बेस्ट इमर्जिंग लाइब्रेरी प्रोफेशनल), डॉ. विपिन कुमार (बेस्ट यंग लाइब्रेरी प्रोफेशनल) और इम्तेयाजुल हक (एलआईएस एजुकेशन में बेस्ट सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर) शामिल रहे।
सत्र के दौरान आयोजन समिति के सदस्यों प्रो. एम. मासूम रजा, प्रो. निशात फातिमा, प्रो. नौशाद अली पी.एम., प्रो. सुधर्मा हरिदासन, प्रो. मेहताब आलम अंसारी, डॉ. मोहम्मद नाजिम और डॉ. मुजम्मिल मुश्ताक को सम्मेलन की सफलता में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इससे पूर्व, आयोजन सचिव प्रो. निशात फातिमा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. मोहम्मद नाजिम ने सम्मेलन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रो. प्रीति महाजन ने समापन वक्तव्य दिया और प्रो. एम. मासूम रजा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
यह सम्मेलन ज्ञान-विनिमय और सहयोग के लिए एक सशक्त मंच साबित हुआ, जिसने पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में एएमयू की शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
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एएमयू डेंटल कॉलेज की रेजिडेंट डा. सबात को राष्ट्रीय सम्मेलन में द्वितीय पुरस्कार
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. जियाउद्दीन अहमद डेंटल कॉलेज के ओरल मेडिसिन एवं रेडियोलॉजी विभाग की जूनियर रेजिडेंट डॉ. सबात फातिमा ने गाजियाबाद स्थित आईटीएस डेंटल कॉलेज में आयोजित 23वें नेशनल ट्रिपल ओ कॉन्फ्रेंस में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
इस सम्मेलन में देश भर से प्रमुख दंत चिकित्सक, शिक्षाविद् और स्नातकोत्तर छात्र शामिल हुए।
डॉ. फातिमा ने “डेस्मोप्लास्टिक एमेलोब्लास्टोमाः एंटीरियर मैंडिबल में एक डायग्नोस्टिक चुनौती” विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें इस दुर्लभ ओडोन्टोजेनिक ट्यूमर के निदान में आने वाली जटिलताओं और सटीक क्लिनिकल एवं रेडियोग्राफिक मूल्यांकन के महत्व को रेखांकित किया गया। उनके प्रस्तुतीकरण को विशेषज्ञों की समिति द्वारा अत्यधिक सराहा गया, जिसके लिए उन्हें स्नातकोत्तर पेपर प्रस्तुति श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
डॉ. फातिमा ने इस उपलब्धि पर अपने मार्गदर्शकों और विभाग के प्रति मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
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एएमयू विमेंस कॉलेज में अल्पकालिक कौशल पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन आमंत्रित
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विमेंस कॉलेज स्थित सेंटर फॉर स्किल डेवलपमेंट एंड करियर प्लानिंग द्वारा महिलाओं की रोजगार क्षमता और व्यावहारिक दक्षताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से अल्पकालिक व्यावसायिक कौशल पाठ्यक्रमों (प्रथम बैच, 2026) के लिए आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
आवेदन पत्र 4 अप्रैल से 30 अप्रैल तक केंद्र के कार्यालय से कार्य समय के दौरान प्राप्त किए जा सकेंगे, जबकि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित की गई है। प्रवेश “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर दिए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें कंप्यूटर आधारित मॉड्यूल जैसे वर्ड प्रोसेसिंग, टाइपिंग (अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू), टैली, इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्रोसेसिंग, वेब डिजाइनिंग एवं पब्लिशिंग तथा पाइथन प्रोग्रामिंग शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ब्यूटी कल्चर, फैशन इलस्ट्रेशन, गारमेंट मेकिंग, टेक्सटाइल डिजाइनिंग, एम्ब्रॉयडरी, इंटीरियर डेकोरेशन, कमर्शियल आर्ट और हैंडीक्राफ्ट जैसे कौशल-आधारित शामिल हैं। साथ ही अंग्रेजी भाषा दक्षता विकास और शॉर्टहैंड के पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
कक्षाएं 4 मई से प्रारंभ होंगी और निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार सप्ताह में तीन दिन आयोजित की जाएंगी।
शुल्क कंप्यूटर संबंधी पाठ्यक्रमों के लिए 2000 रुपये तथा अन्य पाठ्यक्रमों के लिए 1000 रुपये निर्धारित किया गया है, इसके अतिरिक्त 150 रुपये नामांकन शुल्क देय होगा।
यह कार्यक्रम केवल महिला अभ्यर्थियों के लिए है। इच्छुक उम्मीदवार अधिक जानकारी के लिए केंद्र या एएमयू की आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क कर सकते हैं।
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एएमयू में ‘आर्ट बेलेजा 2026’ का समापन, उत्साहपूर्ण भागीदारी रही
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी-सह-उत्सव “आर्ट बेलेजा 2026” का समापन एक भव्य समारोह के साथ हुआ, जिसके साथ बहुदिवसीय आयोजन का सफल समापन हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एएमयू की कुलपति प्रो. नइमा खातून तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. अजरमी दुख्त सफवी, संस्थापक निदेशक, आईपीआर, एएमयू उपस्थित रहीं। इस उत्सव में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, परिवारों और कला प्रेमियों ने भाग लिया और विविध कलात्मक प्रदर्शनों तथा जीवंत वातावरण की सराहना की।
अपने संबोधन में प्रो. नइमा खातून ने विभाग के सामूहिक प्रयासों और रचनात्मकता की प्रशंसा करते हुए इसके बुनियादी ढांचे और विकास को और सुदृढ़ करने के लिए सहयोग का आश्वासन दिया। प्रो. सफवी ने भी इस पहल और प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना की।
इससे पूर्व, अतिथियों का स्वागत शिक्षकों और छात्रों द्वारा किया गया। स्वयंसेवकों, प्रमुखों और सह-प्रमुखों को उनके योगदान के लिए प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. आबिद हादी ने ऐसे आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये मंच कलात्मक प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम समन्वयक अदनान खान ने अपने वक्तव्य में आयोजन की सफलता के लिए छात्रों और आयोजकों के समर्पण तथा टीमवर्क की सराहना की।
समापन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण कुलपति द्वारा उत्सव को एक दिन और बढ़ाने की घोषणा रही, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यंत उत्साह के साथ स्वागत किया।
चार दिनों तक चले इस उत्सव में कला और रचनात्मकता के विविध रूपों का प्रदर्शन हुआ, जिसने प्रतिभागियों में उपलब्धि और प्रेरणा का भाव उत्पन्न किया तथा भविष्य के आयोजनों के लिए नई ऊर्जा प्रदान की।
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एएमयू के एसटीएस स्कूल में साइबर सुरक्षा जागरूकता व्याख्यान आयोजित
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एसटीएस स्कूल (मिंटो सर्किल) में छात्रों को डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से अलीगढ़ पुलिस के साइबर सेल द्वारा साइबर सुरक्षा पर एक जागरूकता व्याख्यान आयोजित किया गया।
विद्यालय के एवी लैब में आयोजित इस सत्र में साइबर सेल के अधिकारियों, इंस्पेक्टर पंकज कुमार (प्रभारी, साइबर सेल), इंस्पेक्टर सचिन सिंह तथा विपिन कुमार, ने सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और साइबर खतरों से बचाव के बारे में व्यावहारिक जानकारी साझा की।
छात्रों को संबोधित करते हुए इंस्पेक्टर पंकज कुमार ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और पहचान की चोरी की बढ़ती घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती सक्रियता के कारण छात्र विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। उन्होंने “डिजिटल हाइजीन” बनाए रखने के महत्व पर बल देते हुए नियमित रूप से पासवर्ड बदलने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने तथा संदिग्ध संदेशों और लिंक से सावधान रहने की सलाह दी।
विपिन कुमार ने इंटरनेट उपयोग के सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए साइबर बुलिंग और गोपनीयता से जुड़े मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने छात्रों को ऑनलाइन गतिविधियों में सावधानी बरतने की सलाह दी और कहा कि गैर-जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के दीर्घकालिक व्यक्तिगत और पेशेवर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी और आवश्यकता पड़ने पर विश्वसनीय वयस्कों से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।
एसटीएस स्कूल के प्राचार्य फैसल नफीस ने अधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि छात्रों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर उप-प्राचार्य डॉ. एम.डी. आलमगीर, डॉ. इलियास मियां, अब्दुल गफ्फार, मोहम्मद अदनान खान और फरहान हबीब भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन गजाला तनवीर ने किया।
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एएमयू में उभरती कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के का कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा 4 और 5 अप्रैल को “उभरता कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस” (आईसीईसीआई-2026) विषय पर द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविद्, शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ और छात्र भाग ले रहे हैं।
आईईईई उत्तर प्रदेश सेक्शन के तकनीकी सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन विश्वविद्यालय पॉलिटेक्निक के असेम्बली हॉल में उद्घाटन सत्र के साथ प्रारंभ होगा। इसमें दस विशिष्ट विषयगत ट्रैकों में प्लेनरी और तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय संस्थानों के प्रतिभागियों द्वारा लगभग 75 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
विभागाध्यक्ष प्रो. अरमान रसूल फरीदी ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में हालिया प्रगति और इसके सतत डिजिटल प्रणालियों में अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि दूसरे दिन आमंत्रित व्याख्यान, प्लेनरी सत्र और समापन समारोह आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं द्वारा मुख्य एवं प्लेनरी व्याख्यान दिए जाएंगे, जिनमें प्रो. डाग ओइविंड मैडसेन (नॉर्वे), प्रो. अब्दुल कय्यूम अंसारी (जामिया मिल्लिया इस्लामिया), प्रो. मोहम्मद अबुलैश (साउथ एशियन यूनिवर्सिटी), डॉ. इकबाल एच. सरकार (ऑस्ट्रेलिया) और प्रो. एम. एन. होदा (नई दिल्ली) शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, आमंत्रित और उद्योग से जुड़े व्याख्यान डॉ. मारिया लैपिना (रूस), डॉ. शाहिद तुफैल (यूएसए), मोहम्मद सोहैल (यूएसए) और मेहरोज अली पाशा (नोएडा) द्वारा दिए जाएंगे।
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एएमयू के वनस्पतिविज्ञानी द्वारा औषधीय पौधों पर पराबैंगनी विकिरण के प्रभाव का अध्ययन
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने औषधीय पौधों पर पराबैंगनी (यूवी) विकिरण के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक अभिनव शोध कार्य आरंभ किया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और औषधीय गुणों में वृद्धि दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संभावनाएँ सामने आई हैं।
समताप मंडल में ओजोन परत के क्षरण के कारण पृथ्वी की सतह पर यूवी विकिरण के बढ़ते स्तर को लेकर चिंताओं के बीच यह शोध यूवीए, यूवीबी और यूवीसी किरणों के विभिन्न प्रभावों पर केंद्रित है। जहाँ यूवीसी किरणें ओजोन परत द्वारा अवशोषित हो जाती हैं, वहीं अधिकांश यूवीए और यूवीबी का एक बड़ा हिस्सा पृथ्वी की सतह तक पहुँचकर जैविक तंत्रों को प्रभावित करता है।
शोध दल ने विशेष प्रयोगशाला व्यवस्थाएँ विकसित कर सफलतापूर्वक स्थापित की हैं, जिनके माध्यम से अश्वगंधा, कोलियस, माको (सोलानम नाइग्रुम), मेंथा, गेंदे का फूल, स्टीविया और रात की रानी (सेस्ट्रम नॉक्टर्नम) जैसे विभिन्न औषधीय पौधों को नियंत्रित यूवी विकिरण के संपर्क में लाया जा रहा है। इस अध्ययन का उद्देश्य इन पौधों की प्राकृतिक यूवी सुरक्षा कवच के रूप में क्षमता का मूल्यांकन करना है, साथ ही फ्लेवोनॉयड्स और एल्कलॉइड्स जैसे जैव-सक्रिय यौगिकों के उत्पादन में संभावित वृद्धि का भी अध्ययन करना है।
यह परियोजना प्रो. एम. मसूरूर खान (सेवानिवृत्त), डॉ. मु. नईम और बीएससी अंतिम वर्ष की छात्रा मारिया खान के नेतृत्व में संचालित हो रही है, जिसे विभागाध्यक्ष प्रो. अबरार ए. खान का पूर्ण सहयोग प्राप्त है। प्रारंभिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि यूवी-प्रेरित तनाव पौधों की औषधीय क्षमता को बढ़ा सकता है, जो प्राकृतिक अनुकूलन तंत्र को दर्शाता है।
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एएमयू में ‘समावेशी एवं सतत विकास’ पर डॉ. आंबेडकर की दृष्टि विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
अलीगढ़, 2 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. आंबेडकर चेयर ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च द्वारा “विकसित भारत /2047 में सततता और समावेशी विकास पर आंबेडकर की दृष्टिः विधि एवं नीति” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. जफर अहमद खान, चेयर प्रोफेसर, आंबेडकर चेयर के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण में डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आंबेडकर की दृष्टि आज भी हमें राष्ट्र के भविष्य के लिए समावेशी और सतत ढांचा तैयार करने की दिशा में मार्गदर्शन देती है।
मुख्य वक्ता प्रो. मोहम्मद नफीस अंसारी, अध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग ने विकसित भारत /2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में विधि, शासन और सामाजिक न्याय के परस्पर संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सतत विकास को समावेशिता के आधार पर निर्मित होना चाहिए, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे।
मुख्य अतिथि, एएमयू रजिस्ट्रार प्रो. आसिम जफर ने नीति निर्माण और राष्ट्र निर्माण में शैक्षणिक विमर्श के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका दूरदर्शी विचारों को क्रियान्वित नीतियों में परिवर्तित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जिससे एक समावेशी और प्रगतिशील भारत का निर्माण संभव हो सके।
हाइब्रिड मोड में आयोजित इस संगोष्ठी में पाँच तकनीकी सत्र शामिल थे, जिन्होंने बौद्धिक आदान-प्रदान के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया। विधि, सामाजिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे विविध क्षेत्रों से प्रतिभागियों द्वारा कुल 41 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जो आंबेडकर की बहुआयामी दृष्टि को प्रतिबिंबित करते हैं।
सत्रों का संचालन डॉ. मोहम्मद नासिर, डॉ. साइम फारूकी और डॉ. सैयद मोहम्मद यावर द्वारा किया गया।
संगोष्ठी में वर्ष 2047 तक सतत और समावेशी विकास प्राप्त करने के लिए आवश्यक समकालीन चुनौतियों और नीतिगत ढाँचों पर सार्थक चर्चा हुई। विद्वानों ने सामाजिक समानता, विधिक सुधारों से लेकर विकास के वैश्विक दृष्टिकोण तक विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का समापन शैक्षणिक समृद्धि और सहयोगात्मक सहभागिता के साथ हुआ।













