हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
क्या है पूर्ण सूर्य ग्रहण?
पूर्ण सूर्य ग्रहण एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है। यह संयोग इसलिए संभव हो पाता है क्योंकि सूर्य चंद्रमा से लगभग 400 गुना बड़ा होने के बावजूद उतनी ही दूरी पर स्थित है, जिससे दोनों आकाश में समान आकार के दिखाई देते हैं। इस दौरान कुछ मिनटों के लिए दिन में ही अंधेरा छा जाता है और आसमान में तारे तक नजर आने लगते हैं।
कब और कहां दिखेगा यह अद्भुत नजारा?
अगला पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा, जिसकी अवधि लगभग 2 मिनट 18 सेकंड होगी। यह ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन के कुछ हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। ग्रीनलैंड में यह दोपहर के समय, आइसलैंड में शाम करीब 5:45 बजे और स्पेन में सूर्यास्त के आसपास देखने को मिलेगा। हालांकि, भारत में यह दिखाई नहीं देगा क्योंकि उस समय यहां रात होगी।
भारत में क्या होगा असर?
भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे से शुरू होकर 13 अगस्त सुबह 4:25 बजे तक रहेगा। चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका धार्मिक या ज्योतिषीय प्रभाव भी नहीं माना जाएगा और सूतक काल भी लागू नहीं होगा।
ग्रहण के दौरान क्या होता है खास?
ग्रहण की शुरुआत आंशिक चरण से होती है, जब चंद्रमा धीरे-धीरे सूर्य को ढकना शुरू करता है। जैसे-जैसे सूर्य का हिस्सा कम होता जाता है, रोशनी घटती है, तापमान गिरता है और परछाइयां स्पष्ट होने लगती हैं। पूर्ण अवस्था में कुछ मिनटों के लिए अंधकार छा जाता है और सूर्य का बाहरी हिस्सा ‘कोरोना’ दिखाई देता है।
सुरक्षित तरीके से कैसे देखें?
सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सुरक्षा बेहद जरूरी है। पूर्ण ग्रहण के कुछ क्षणों को छोड़कर कभी भी बिना सुरक्षा के सूरज की ओर नहीं देखना चाहिए। इसके लिए प्रमाणित ‘सोलर एक्लिप्स ग्लासेज़’ का उपयोग करना अनिवार्य है, ताकि आंखों को नुकसान से बचाया जा सके।
#SolarEclipse2026 #TotalSolarEclipse #Astronomy #SpaceEvents #ScienceNews













