हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
अलीगंज की बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग; SIT गठित, सात दिन में मांगी गई रिपोर्ट
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। सेक्टर-डी स्थित एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 9 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में अधिकांश छात्र-छात्राएं बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और बिल्डिंग मालिक समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जानकारी के अनुसार, इमारत के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल पर पेट शॉप व क्लीनिक संचालित थे, जबकि दूसरे तल पर ‘लर्निंग स्पेस’ नामक लाइब्रेरी, कोचिंग सेंटर और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ नाम का 3D आर्ट एवं एनिमेशन स्टूडियो चल रहा था। दोपहर करीब 1:30 बजे आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में धुआं पूरी इमारत में फैल गया और कई लोग अंदर फंस गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कई छात्रों ने जान बचाने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था। वहीं एक छात्र पहली मंजिल से कूद गया, जबकि पांच अन्य लोग बिजली के केबल के सहारे नीचे उतरकर बाहर निकलने में सफल रहे। फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव टीमों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने पर जानकीपुरम कलेक्शन के अधिशासी अभियंता गौरव कुमार, इंदिरानगर फायर स्टेशन के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह, सहायक अभियंता अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे को निलंबित कर दिया गया है।
अलीगंज थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत छह नामजद समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, रामकृष्ण उपाध्याय, सुरेश कुमार साहू और तुषार कृष्णा जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार की दो सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। टीम को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। हादसे के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिर फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण ऐसे हादसे कब तक लोगों की जान लेते रहेंगे।













