हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
दान गिनती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, CCTV रिकॉर्डिंग, बैंक की चेतावनी और कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर जांच तेज; आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में।
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच में दान गिनने की प्रक्रिया में तय नियमों (SOP) और बैंक-ट्रस्ट के बीच हुए समझौता (MoU) के कथित उल्लंघन की बात सामने आई है। साथ ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कुछ फैसलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि उनका नाम एफआईआर में शामिल नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, दान पेटियां खोलने और नकदी की गिनती के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बैंक प्रतिनिधियों की अनिवार्य मौजूदगी, कर्मचारियों के ड्रेस कोड, सुरक्षा जांच और गिनती कक्ष में तलाशी जैसे कई नियम केवल कागजों तक सीमित रहे। आरोप है कि बैंक ने तीन महीने पहले कर्मचारियों के रोटेशन और व्यवस्था में बदलाव का सुझाव दिया था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि ट्रस्ट के पूर्व चालक रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास कई दान पेटियों की चाबियां थीं। आरोप है कि टिन्नू ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को बिना पर्याप्त जांच और अनुभव के नकदी गिनने के कार्य में शामिल कराया। पुलिस के मुताबिक, इन्हीं में से एक सह-आरोपी मनीष कुमार यादव को भी उसने नियुक्त कराया था।
SIT ने यह भी पाया कि दान गिनती से जुड़े CCTV फुटेज को निर्धारित 180 दिनों के बजाय केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखा गया। सुरक्षा गार्ड की तैनाती, तलाशी और अन्य मानक सुरक्षा उपायों का भी पालन नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज कर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक छह आरोपियों से करीब 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की जा चुकी है। वहीं, चंपत राय ने कहा है कि टिन्नू पर लंबे समय से भरोसा था और रोजगार देने के उद्देश्य से अवसर दिया गया था, जबकि नियुक्तियों का निर्णय केवल उनका व्यक्तिगत फैसला नहीं था।
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