पाकिस्तान को बिना नाम लिए चेताया, AI, मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन युद्ध समेत वैश्विक चुनौतियों पर भारत का रुख रखा
संयुक्त राष्ट्र, एजेंसी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मिडिल ईस्ट संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने या उसके परिणामों से बचने की दलीलें स्वीकार नहीं की जा सकतीं। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराने और उसके वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत है।
जयशंकर ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करेगा और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकती।
AI में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर जोर
AI का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने भारत में आयोजित AI Impact Summit का जिक्र किया। उन्होंने AI को मानव सशक्तीकरण, आर्थिक समृद्धि और बड़े पैमाने पर समस्याओं के समाधान का माध्यम बताया। साथ ही कहा कि प्रत्येक देश को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप AI Ecosystem, Models और Deployment Strategy विकसित करने का अधिकार होना चाहिए। भारत ने AI को ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारी के एजेंडे का हिस्सा बताया।
समुद्री सुरक्षा और युद्धों पर चिंता
जयशंकर ने मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच लाल सागर से काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों और नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। रूस-यूक्रेन संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत का रास्ता देना चाहिए। भारत शांति की दिशा में जारी पहलों का समर्थन करता है।
ग्लोबल साउथ के ‘4F’ संकट का उल्लेख
विदेश मंत्री ने ग्लोबल साउथ के सामने Food, Fuel, Fertilizer और Finance यानी ‘4F’ संकट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक की कमी तथा अनाज की आपूर्ति में बाधाओं पर चिंता जताई। जयशंकर ने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और नई वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने महात्मा गांधी के संदेश को दोहराते हुए कहा, “शांति का कोई रास्ता नहीं है, शांति ही रास्ता है।”
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