घटस्थापना के साथ नौ दिवसीय पर्व शुरू, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना से भक्त करेंगे पूजा-अर्चना
नई दिल्ली, हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ । शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना का विधान है। सुबह से ही श्रद्धालु घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की उपासना से सुख-समृद्धि, आरोग्य, शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
दो शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं घटस्थापना
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। इसे नवरात्रि पूजा का शुभारंभ माना जाता है। दिए गए मुहूर्त के अनुसार, सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक घटस्थापना की जा सकती है। इसके अलावा सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना का विकल्प है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं मां शैलपुत्री
मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। संस्कृत में ‘शैल’ का अर्थ पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ बेटी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। भगवान शिव से विवाह होने के बाद उन्होंने एक प्रसंग में योगाग्नि से अपना शरीर त्याग दिया था। इसके बाद उन्होंने हिमालय के घर पुनर्जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं।
मां शैलपुत्री के दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित होता है। उनका वाहन वृषभ यानी बैल है। इन्हें शक्ति, धैर्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
सफेद फूल और घी का भोग प्रिय
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में सफेद और हल्के पीले रंग को शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मां को सफेद फूल, अक्षत, रोली और कुमकुम अर्पित कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा दूध-चावल की खीर, पेड़ा और मावा से बनी मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं।
इस मंत्र के जाप से करें मां की आराधना
मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान श्रद्धालु इस मंत्र का जाप कर सकते हैं—
‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥’
पूजा के समय श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार मंत्र जाप करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 108 बार मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
ऐसे करें मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर विधि-विधान से कलश स्थापना करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां शैलपुत्री की प्रतिमा अथवा तस्वीर स्थापित करें। मां को रोली, अक्षत और फूल अर्पित कर घी का दीपक जलाएं। इसके बाद धूप, भोग और मंत्र जाप के साथ पूजा करें। अंत में दुर्गा चालीसा का पाठ कर मां की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
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