हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 12 मई : 2025,
लखनऊ। राजधानी के उपडाकघर एलडीए कॉलोनी में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। यहां संविदा पर कार्यरत डाकघर कर्मचारी दीपू यादव और एक खाताधारक विपिन कुमार के खिलाफ कृष्णानगर पुलिस ने गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। यह कार्रवाई डाकघर पश्चिमी उपमंडल के सहायक अधीक्षक हरिहर नाथ मणि त्रिपाठी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई है।
फर्जी खाते खोलकर करोड़ों की हेराफेरी
शिकायत के अनुसार, दीपू यादव पर फर्जी खातों को खोलने, फर्जी पासबुक जारी करने और खातों से अनधिकृत रूप से धन निकालने का आरोप है। फरवरी 2025 में विभाग ने दीपू को संविदा सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इसके कुछ समय बाद ही उपडाकघर एलडीए कॉलोनी के कई खाताधारकों ने अपनी जमा धनराशि के गबन की शिकायत की थी।
खाताधारकों ने बताया कि उन्होंने अपने नए खातों में पैसे जमा कराने के लिए दीपू को नकद राशि सौंपी थी, लेकिन विभागीय जांच में सामने आया कि जिन खातों की बात की जा रही थी, वे फर्जी थे और दूसरे व्यक्तियों के नाम पर खोले गए थे। खाताधारकों को जाली पासबुक थमा दी गई थी और असली खातों में जमा रकम दर्शाई ही नहीं गई थी।
विपिन कुमार के खाते में ट्रांसफर हुई रकम
हरिहर नाथ त्रिपाठी के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि दीपू ने इन फर्जी खातों में जमा राशि को परिपक्वता अवधि से पहले ही निकाल लिया और उसे विपिन कुमार के खाते में ट्रांसफर कर दिया। विपिन कुमार आशाराम बापू नगर, कृष्णानगर का निवासी है और उसका बचत खाता एलडीए कॉलोनी स्थित उपडाकघर में है।
इसके बाद विपिन कुमार ने वह पूरी राशि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में अपने खाते में ट्रांसफर कर ली। यह संदेह जताया जा रहा है कि दोनों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया।
जांच जारी, सामने आ सकते हैं और नाम
सहायक अधीक्षक ने बताया कि वर्तमान में एलडीए कॉलोनी उपडाकघर के सभी खातों की जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि इस घोटाले में और भी खातों के साथ हेराफेरी की गई हो सकती है। मामले की जांच गहनता से की जा रही है।
इंस्पेक्टर पीके सिंह ने बताया कि जांच और साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आरोपी दीपू यादव और विपिन कुमार के खिलाफ दर्ज मुकदमे में धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी धन के दुरुपयोग जैसी धाराएं लगाई गई हैं।
क्या कहता है कानून?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के वित्तीय अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), और 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत आते हैं, जिनमें कड़ी सजा का प्रावधान है।

















