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उत्तर प्रदेश में सिविल डिफेंस व्यवस्था का विस्तार: स्थानीय सुरक्षा तंत्र होगा मजबूत, युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार


हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑16 मई : 2025

लखनऊ। भारत-पाकिस्तान के बीच हाल ही में उत्पन्न हुए तनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब राज्य के सभी 75 जिलों में ‘सिविल डिफेंस’ प्रणाली को लागू किया जाएगा। अभी तक यह व्यवस्था केवल 15 जिलों तक सीमित थी।

सिविल डिफेंस एक ऐसी व्यवस्था है जिसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों—जैसे प्राकृतिक आपदा, युद्ध या अन्य मानवीय संकट—में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की एक टीम तैयार की जाती है जो संकट के समय बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती है।

सरकार की योजना क्या है?

राज्य सरकार ने इस दिशा में विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। इसके तहत:

  • सभी 75 जिलों में सिविल डिफेंस इकाइयों की स्थापना की जाएगी।
  • प्रशिक्षण केंद्रों और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी।
  • जन-जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
  • युवाओं को आपदा प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा और राहत कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था के विस्तार से स्थानीय स्तर पर सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा और बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की यह टीम राज्य के किसी भी कोने में आपात स्थिति आने पर त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम होगी।

7 मई को देशभर में आयोजित ‘नागरिक सुरक्षा मॉकड्रिल’ के दौरान उत्तर प्रदेश के सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों ने अपनी कार्यक्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इन स्वयंसेवकों ने आम लोगों को सतर्क करने, सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने जैसे कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रशिक्षित स्वयंसेवक आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा में कितनी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

सिविल डिफेंस सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित नहीं है। यह व्यवस्था युद्ध जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में भी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होती है। बमबारी या अन्य आपात स्थिति में यह तंत्र लोगों को सुरक्षित निकालने, उन्हें जरूरी सहायता पहुंचाने और राहत शिविरों के संचालन में भी मदद करता है।

इस नई पहल के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार हो रहा है, बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित आंतरिक या बाहरी खतरे से निपटने की क्षमता भी विकसित कर रहा है। यह एक दूरदर्शी निर्णय है, जो न केवल सुरक्षा की दृष्टि से अहम है, बल्कि युवाओं के लिए एक सार्थक अवसर भी लेकर आया है।

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