सही विधि से करें शिव पूजा, छोटी-सी चूक भी कर सकती है पूजा का फल अधूरा
धर्म-कर्म | भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण (सावन) मास की शुरुआत आज से हो गई है। सुबह से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मान्यता है कि सावन में सच्चे मन, श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव आराधना से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के दौरान नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि छोटी-सी गलती भी पूजा के पूर्ण फल में बाधा बन सकती है।
ऐसे करें भोलेनाथ की सरल पूजा
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या शिवालय में दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा का संकल्प लें। सबसे पहले शिवलिंग का शुद्ध जल से अभिषेक करें, इसके बाद पंचामृत और अंत में गंगाजल अर्पित करें। फिर चंदन का त्रिपुंड लगाकर भस्म अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और आक के फूल चढ़ाएं। फल, मिठाई का भोग लगाकर धूप-दीप से आरती करें और पूरे समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते रहें।
पूजा के लिए रखें ये सामग्री
शिव पूजा से पहले गंगाजल, शुद्ध जल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार करें। इसके अलावा बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, शमी पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, भस्म, जनेऊ, धूप, दीप, फल और मिठाई की व्यवस्था कर लें। धार्मिक मान्यता है कि इन सामग्रियों से पूजा करने पर भगवान शिव प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
इन नियमों का रखें विशेष ध्यान
शिवलिंग पर जल अर्पित करने का श्रेष्ठ समय ब्रह्म मुहूर्त से सुबह 10 बजे तक माना गया है। जल चढ़ाते समय दक्षिण दिशा में खड़े होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करें। जल अर्पित करने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के पात्र का उपयोग करें, लेकिन तांबे के पात्र में दूध भरकर शिवलिंग पर अर्पित न करें। जल की धारा पतली और लगातार होनी चाहिए तथा पहले जलाधारी और फिर शिवलिंग पर जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।



















