हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑16 मई : 2025
नई दिल्ली।
इंडिया अलायंस की एकजुटता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं और इस बार आवाज उठी है खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की ओर से। कांग्रेस के ओल्ड गॉर्ड्स में गिने जाने वाले और साफगोई के लिए मशहूर चिदंबरम ने न सिर्फ गठबंधन की कमजोरी उजागर की है, बल्कि पाकिस्तान मसले पर प्रधानमंत्री मोदी की खुलकर तारीफ भी की है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस के दिग्गज नेता अब पार्टी लाइन से अलग सुर अपनाने लगे हैं?
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने हाल ही में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की किताब के विमोचन समारोह में बोलते हुए इंडिया गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि,
“ऐसा नहीं लगता कि इंडिया गठबंधन अब भी पूरी तरह एकजुट है। यह बिखरता हुआ दिखाई देता है और इसका भविष्य उज्ज्वल नहीं दिखता।”
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन को जोड़ा जा सकता है, बशर्ते समय रहते सही कदम उठाए जाएं। चिदंबरम की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले गठबंधन की एकता पहले ही संदेह के घेरे में है।
इससे पहले चिदंबरम ने एक लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान नीति की सराहना करते हुए कहा था कि मोदी सरकार ने सीमित सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुनकर एक बड़े युद्ध को टाल दिया। उन्होंने लिखा,
“सरकार की कार्रवाई सीमित और सुनियोजित थी, जिसका मकसद आतंकी ढांचे को खत्म करना था। यह प्रधानमंत्री मोदी का समझदारी भरा कदम था।”
इस बयान ने कांग्रेस नेतृत्व को चौंका दिया, क्योंकि यह पार्टी की आधिकारिक लाइन से मेल नहीं खाता।
राजनीतिक विश्लेषक अब इस घटनाक्रम को शशि थरूर के रुख से जोड़कर देख रहे हैं। थरूर भी कई बार प्रधानमंत्री मोदी की शैली की तारीफ कर चुके हैं, जिससे उन्हें पार्टी के भीतर आलोचना झेलनी पड़ी थी। अब जब चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेता भी खुले तौर पर ऐसी बातें कह रहे हैं, तो यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के भीतर एक वैचारिक बदलाव की आहट है?
यह स्थिति कांग्रेस हाईकमान के लिए असहज करने वाली है। जब पार्टी विपक्षी गठबंधन की अगुवाई करने की कोशिश कर रही है, ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं द्वारा पार्टी लाइन से अलग बयान देना पार्टी की एकता और रणनीति दोनों पर असर डाल सकता है। कांग्रेस को अब यह तय करना होगा कि वह इन बयानों को ‘व्यक्तिगत विचार’ मानकर नजरअंदाज करती है या संगठनात्मक अनुशासन के तहत कोई ठोस कदम उठाती है।
पी. चिदंबरम के हालिया बयानों ने न सिर्फ इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी नई बहस को जन्म दे दिया है। यह कहना जल्दबाजी होगी कि ये बयान किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं या सिर्फ व्यक्तिगत राय। लेकिन इतना जरूर साफ है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से पार्टी लाइन से हटकर बयान सामने आना पार्टी की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
















