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त्योहार और छुट्टियों के दौरान टिकटों की बेतहाशा कीमतों पर कोर्ट की चिंता, 3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
नई दिल्ली। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों की मनमानी कीमतों से परेशान यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि हवाई किरायों को विनियमित (रेगुलेट) करने के लिए तैयार किए गए नियमों की प्रति दो सप्ताह के भीतर अदालत में प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें एयरलाइंस द्वारा अपनाई जा रही डायनेमिक प्राइसिंग और त्योहारों व अवकाश के समय टिकटों की कीमतों में होने वाली अप्रत्याशित बढ़ोतरी पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हवाई किरायों को नियंत्रित करने के लिए नियमों का मसौदा तैयार कर लिया गया है। सरकार ने कहा कि इन नियमों को अगले 30 दिनों के भीतर संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाने की संभावना है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नियमों की प्रति दो सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर पेश करने का निर्देश दिया।
याचिका में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में निजी एयरलाइंस कंपनियां पर्याप्त नियमन के अभाव में डायनेमिक प्राइसिंग का सहारा लेकर यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूलती हैं। विशेष रूप से त्योहारों, लंबी छुट्टियों और आपात परिस्थितियों में टिकटों की कीमतें कई गुना तक बढ़ जाती हैं, जिससे आम यात्रियों पर आर्थिक बोझ पड़ता है।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कई एयरलाइंस टिकट के मूल किराए के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के शुल्क जोड़कर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालती हैं। स्पष्ट और प्रभावी दिशा-निर्देशों के अभाव में यात्रियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार हो रहे नियमों से हवाई किरायों में पारदर्शिता आने और मनमानी मूल्य निर्धारण पर अंकुश लगने की उम्मीद बढ़ गई है।
















