हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। सबसे बड़ा फैसला वृद्धावस्था पेंशन योजना में डिजिटल सुधार का रहा। अब बुजुर्गों को पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। फैमिली आईडी–एक परिवार, एक पहचान प्रणाली के आधार पर पात्र नागरिकों की सूची अपने-आप तैयार होगी। यह सूची समाज कल्याण विभाग के पोर्टल पर जाएगी, जिसके बाद विभाग फोन, एसएमएस और व्हाट्सऐप के जरिए उनसे संपर्क करेगा। कर्मचारी उनके घर जाकर औपचारिकताएं पूरी करेंगे और बायोमीट्रिक सत्यापन भी वहीं होगा।
राज्य में वर्तमान में 67.50 लाख बुजुर्ग पेंशन पा रहे हैं। नई व्यवस्था से 8.25 लाख नए पात्रों को लाभ मिलने का अनुमान है। जो नागरिक अगले 90 दिनों में 60 वर्ष के होने वाले हैं, उनका नाम भी स्वचालित रूप से सूची में शामिल हो जाएगा। सहमति मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर डिजिटल हस्ताक्षर से स्वीकृति पत्र जारी होगा और पेंशन सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेज दी जाएगी। शुरुआत में यह व्यवस्था गोरखपुर, गाजियाबाद, हरदोई, कन्नौज और ललितपुर में पायलट रूप में लागू होगी।
दूसरा बड़ा फैसला किरायानामा पंजीकरण शुल्क में भारी कमी का है। अब एक साल का पंजीकृत करारनामा सिर्फ ₹500 में और दस साल का ₹2000 में कराया जा सकेगा। यह राहत औसत वार्षिक किराया 10 लाख रुपये तक की संपत्तियों पर लागू होगी। सरकार का उद्देश्य मकान मालिक और किराएदार के बीच होने वाले विवादों को कम करना है। टोल और खनन पट्टों को इस छूट से बाहर रखा गया है।
तीसरा महत्वपूर्ण निर्णय ग्रेटर नोएडा–बलिया आठ लेन एक्सप्रेसवे को रद्द करने का रहा। यूपीडा ने बताया कि एनसीआर को पूर्वी यूपी से जोड़ने का उद्देश्य यमुना, आगरा, पूर्वांचल और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे से पूरा हो चुका है, इसलिए इस परियोजना की आवश्यकता नहीं रह गई।















