हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
लखनऊ। स्वच्छता की दिशा में उत्तर प्रदेश ने इस बार इतिहास रच दिया है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में प्रदेश ने न केवल पिछली बार की तुलना में बेहतरीन प्रदर्शन किया, बल्कि कई नए मानकों पर खुद को शीर्ष राज्यों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है। वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में यूपी के शहरों ने Water+, ODF++, और Garbage Free Cities (GFC) जैसे मानकों पर उल्लेखनीय सुधार किया है।
Water+ और ODF++ शहरों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी
2023 में केवल 2 शहर (प्रयागराज और नोएडा) Water+ घोषित किए गए थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 16 हो गई है। इसी प्रकार ODF++ शहरों की संख्या 129 से बढ़कर 337 तक पहुंच गई, जो साफ दर्शाता है कि स्वच्छता को लेकर स्थानीय निकाय और जनता दोनों पहले से ज्यादा जागरूक और जिम्मेदार हुए हैं।
Garbage Free Cities (GFC): लखनऊ का ऐतिहासिक प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ देश का पहला 7 स्टार Garbage Free City बनकर उभरा है। 2023 में कोई भी शहर 7 स्टार नहीं हासिल कर सका था, वहीं इस बार 6 शहरों को 5 स्टार रेटिंग मिली है – आगरा, गोरखपुर, कानपुर, गाज़ियाबाद, प्रयागराज और नोएडा।
| स्टार | 2023 | 2024 |
|---|---|---|
| 7 स्टार | 0 | 1 (लखनऊ) |
| 5 स्टार | 1 (नोएडा) | 6 शहर |
| 3 स्टार | 8 शहर | 6 शहर |
| 1 स्टार | 56 शहर | 70 शहर |
| कुल GFC शहर | 65 | 83 |
जनसंख्या श्रेणियों के अनुसार प्रदर्शन
🔸 मिलियन प्लस सिटीज़ (10 लाख+ जनसंख्या)
- लखनऊ ने टॉप 3 में जगह बनाई।
- लखनऊ और आगरा टॉप 10 में।
- 6 शहर टॉप 20 में शामिल: लखनऊ, आगरा, गाज़ियाबाद, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी।
🔸 3–10 लाख जनसंख्या वाले शहर
- गोरखपुर टॉप 5 में
- गोरखपुर व मुरादाबाद टॉप 10 में
- कुल 7 शहर टॉप 20 में शामिल
🔸 50,000 – 3 लाख जनसंख्या
- टॉप 5 से टॉप 20 तक कोई उपलब्धि नहीं
- बिजनौर टॉप 30 में (रैंक 29),
- मोदीनगर और बिजनौर टॉप 40 में
🔸 20,000 – 50,000 जनसंख्या
- अनूपशहर टॉप 20 में (रैंक 13)
- सिधौली के साथ टॉप 30 में 2 शहर
🔸 20,000 से कम जनसंख्या वाले कस्बे
- इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश का कोई भी शहर टॉप 100 में नहीं आ सका
बड़े शहरों में प्रगति, छोटे शहरों की रफ्तार धीमी
उत्तर प्रदेश ने स्वच्छता के मानकों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़े शहरों में देशभर में अपनी छवि बेहतर की है। हालांकि, छोटे नगरों और कस्बों में सुधार की काफी गुंजाइश अभी भी बाकी है।
स्वच्छ भारत मिशन की सफलता के लिए अब ज़रूरत है कि ग्राम पंचायतों व छोटे शहरी निकायों को भी उसी तरह सशक्त और सक्रिय किया जाए जैसा कि मिलियन प्लस शहरों के साथ हुआ है।

















