हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ बुधवार 28 मई 2025
उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने में बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। राज्य में बिजली बिल में 4.27 फीसदी की वृद्धि की गई है, जो नई ईंधन अधिभार शुल्क नीति के तहत लागू की जा रही है। इस बढ़ोतरी के जरिए मार्च महीने के 390 करोड़ रुपये के अधिभार को जून के बिलों में वसूला जाएगा।
बता दें कि इससे पहले अप्रैल में बिजली दरों में 1.24 फीसदी की वृद्धि की गई थी, जबकि मई में 2 फीसदी की कमी की गई थी। लेकिन अब जून में एक बार फिर से दरें बढ़ने पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने तीखा विरोध जताया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इस बढ़ोतरी को गैर-कानूनी बताते हुए कहा है कि इससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
परिषद ने जताया कड़ा विरोध, बताई गैर-कानूनी
अवधेश वर्मा ने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन ने मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन के तहत संशोधित एआरआर में 30 फीसदी दर वृद्धि का प्रस्ताव रखा है, जो पहले से ही महंगाई से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए असहनीय बोझ बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ईंधन अधिभार शुल्क के बजाय, बिजली उपभोक्ताओं के बकाया से इस राशि की कटौती की जानी चाहिए।
वर्मा ने कहा,
“जब अधिभार अधिक हो, तो उसे उपभोक्ताओं के बकाया से समायोजित करना चाहिए, न कि सीधे बिल में जोड़कर उन पर बोझ डालना चाहिए।”
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि परिषद इस मामले को जल्द ही उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष उठाएगी।
निजीकरण पर भी सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग
अवधेश वर्मा ने बिजली क्षेत्र में निजीकरण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा महत्वपूर्ण फैसला लेने से पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराना जरूरी है। उन्होंने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के 2015 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वहां विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 86(2) के तहत राज्य सरकार को निजीकरण से पहले जांच कराने की सलाह दी गई थी।
वर्मा ने मांग की कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग भी यूपी सरकार को यही सलाह दे, ताकि निजीकरण के प्रभावों का मूल्यांकन किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा किया जा सके। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
3.45 करोड़ उपभोक्ताओं पर असर, भारी बकाया
राज्य में वर्तमान में करीब 3.45 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। ऐसे समय में जब उपभोक्ताओं पर विद्युत निगमों का 33,122 करोड़ रुपये बकाया है, बिजली दरों में इस तरह की बढ़ोतरी कई परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगाई पहले से ही आसमान छू रही है और अब बिजली बिल में बढ़ोतरी से उनकी जेब पर और बोझ बढ़ेगा।