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भारत-चीन के बीच स्थायी सीमांकन की मांग, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ बैठक में उठाया मुद्दा

नई दिल्ली। हिन्दुस्तान मिरर न्यूज,28 जून 2025
भारत ने शुक्रवार को चीन के साथ सभी विवादों के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कजाखिस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए चार प्रमुख सुझाव दिए। उन्होंने खासतौर पर दोनों देशों के बीच सीमांकन को स्थायी और स्पष्ट रूप से तय करने की आवश्यकता बताई।

राजनाथ सिंह ने चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव और गतिरोध खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने बातचीत के ज़रिये विवाद सुलझाने पर बल दिया और कहा कि द्विपक्षीय संबंध तभी सामान्य हो सकते हैं जब सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनी रहे।

🔴 सीमा पर शांति के लिए दिए गए चार प्रमुख सुझाव:
1. स्थायी सीमांकन:
सीमा पर स्थायी समाधान के लिए स्पष्ट सीमांकन आवश्यक है ताकि भविष्य में विवाद की गुंजाइश न रहे।
2. विश्वास बहाली:
दोनों देशों को विश्वास बहाली के लिए विशेष प्रयास करने होंगे और वर्तमान स्थिति को यथाशीघ्र सामान्य बनाना होगा।
3. सैनिक संवाद को प्राथमिकता:
तनावपूर्ण स्थितियों में सैन्य वार्ता के ज़रिए तत्काल समाधान ढूंढ़ा जाए।
4. सीमापार उल्लंघन पर सख्ती:
किसी भी प्रकार की घुसपैठ को सख्ती से रोका जाए और स्पष्ट समझौते के तहत सीमा की निगरानी की जाए।

🔍 चीन को ऑपरेशन सिंधु की जानकारी

रक्षामंत्री ने भारत-चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी चीन को जानकारी दी कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत आतंकवाद और ड्रग तस्करी को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति स्पष्ट है – बिना किसी समझौते या सहानुभूति के आतंकवाद का जवाब दिया जाएगा।

🇮🇳 आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

राजनाथ सिंह ने एससीओ देशों को भारत में विकसित स्वदेशी हथियार प्रणालियों की जानकारी दी और रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत कई देशों के साथ रक्षा सहयोग मजबूत कर रहा है।

🔴 विदेश मंत्री का सख्त बयान – आतंकवाद के संदर्भ में ‘बिना शर्त स्वीकार्यता’ नहीं

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी शुक्रवार को कहा कि आतंकवाद को किसी भी प्रकार की मान्यता देना या समर्थन करना स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर स्पष्ट नीति होनी चाहिए।

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