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भारत में दिवाली, लंदन में ‘दिवाला’! क्या सच में हमने खरीद ली दुनिया की सारी चांदी ?

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

भारत की दिवाली खरीदारी ने इस बार वैश्विक स्तर पर “सिल्वर शॉक” पैदा कर दिया है। त्योहारों के मौसम में भारी मांग के चलते भारत का सबसे बड़ा रिफाइनर MMTC-Pamp तक चांदी से खाली हो गया। कंपनी के ट्रेडिंग हेड विपिन रैना ने बताया कि अपने 27 साल के करियर में उन्होंने चांदी की ऐसी दीवानगी पहले कभी नहीं देखी। इस बार भारत में चांदी की खरीद केवल परंपरा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह निवेश और सोशल मीडिया के प्रचार का मिश्रण बन गई।

दरअसल, महीनों से सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड चल रहा था कि सोना अपनी ऊंचाई पर पहुंच चुका है और अब “चांदी की बारी” है। कंटेंट क्रिएटर सार्थक आहुजा का एक वायरल वीडियो, जिसमें उन्होंने सोना-चांदी का 100:1 अनुपात दिखाते हुए चांदी को “साल का सबसे बड़ा दांव” बताया था, निवेशकों में ‘FOMO’ (Fear Of Missing Out) फैला गया। इसके चलते त्योहारों के साथ-साथ आम निवेशक भी चांदी पर टूट पड़े।

इसी बीच चीन में छुट्टियों के कारण सप्लाई ठप पड़ गई, जिससे भारत के डीलरों ने लंदन का रुख किया। लेकिन वहां के वॉल्ट्स (भंडार) पहले से ही खाली हो चुके थे। सोलर पैनल उद्योग और अमेरिकी बाजार में शिपिंग मांग ने पहले ही चांदी के स्टॉक पर दबाव डाल दिया था। 2025 की शुरुआत से ही ETF निवेशकों ने 1 करोड़ औंस से अधिक चांदी खरीद ली थी। जब भारत की मांग इस पहले से तनावग्रस्त बाजार से टकराई, तो पूरा सिस्टम चरमरा गया।

जेपी मॉर्गन जैसे बड़े बैंकों ने अक्टूबर के लिए भारत को चांदी सप्लाई करने से मना कर दिया, और कहा कि अगली खेप नवंबर में ही मिलेगी। नतीजतन भारत में चांदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर से $5 प्रति औंस ऊपर चली गई। कोटक, UTI और SBI म्यूचुअल फंड्स ने अपने सिल्वर ETF में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी।

9 अक्टूबर, धनतेरस से ठीक पहले, लंदन के बाजार में तरलता पूरी तरह खत्म हो गई। कोई भी चांदी बेचने को तैयार नहीं था, सिर्फ खरीदार थे। रातों-रात चांदी उधार लेने की दर 200% तक बढ़ गई और बड़े बैंकों ने ट्रेडिंग रोक दी। बोली और पूछ के बीच इतना बड़ा अंतर आ गया कि कारोबार लगभग ठप पड़ गया। स्विस रिफाइनर Argor-Heraeus के CEO ने कहा, “लंदन में लीज के नजरिए से अब कोई लिक्विडिटी नहीं बची थी।”

यह संकट 1980 के “सिल्वर थर्सडे” की याद दिलाता है, जब हंट ब्रदर्स ने चांदी के बाजार पर कब्जा करने की कोशिश की थी और कीमतें $6 से $50 प्रति औंस तक पहुंच गई थीं। 1998 में वॉरेन बफे की कंपनी द्वारा भारी खरीदारी से भी ऐसा ही झटका लगा था। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 का यह संकट उन दोनों घटनाओं के बाद का सबसे बड़ा वैश्विक सिल्वर शॉक है — और इसकी जड़ें सीधे तौर पर भारतीय दिवाली की दीवानगी में छिपी हैं।

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