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“मिशन अस्मिता”: यूपी पुलिस ने किया लव जिहाद और अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का भंडाफोड़, 10 गिरफ्तार

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:19 जुलाई 2025

मुख्यमंत्री के निर्देश में जीरो टॉलरेंस नीति पर अमल
उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यूपी पुलिस लगातार गंभीर अपराधों पर कठोर कार्रवाई कर रही है। मिशन “अस्मिता” इसी नीति की कड़ी है, जिसके तहत अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा
यूपी एसटीएफ और एटीएस ने हाल ही में छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन के नेतृत्व में चल रहे एक बड़े अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इस गिरोह का उद्देश्य लव जिहाद, डार्क वेब, अंतरराष्ट्रीय जिहादी फंडिंग और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को अंजाम देना था।

देशभर में फैला नेटवर्क, 6 राज्यों से गिरफ्तारी
पुलिस कमिश्नर आगरा श्री दीपक कुमार के नेतृत्व में 6 राज्यों—गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान व उत्तर प्रदेश—से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ये आरोपी विशेष रूप से नाबालिग लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित करते थे।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान

  1. आयशा (पूर्व में एस.बी. कृष्णा) – गोवा
  2. अली हसन (शेखर रॉय) – कोलकाता
  3. ओसामा – कोलकाता
  4. रहमान कुरैशी – आगरा
  5. अब्बू तालिब – मुजफ्फरनगर
  6. अबुर रहमान – देहरादून
  7. मोहम्मद अली – जयपुर
  8. जुनैद कुरैशी – जयपुर
  9. मुस्तफा (पूर्व में मनोज) – दिल्ली
  10. मोहम्मद अली – जयपुर

PFI, SDPI और पाकिस्तान कनेक्शन की जांच
प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार PFI, SDPI और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े पाए गए हैं। गिरोह की फंडिंग अमेरिका और कनाडा से हो रही थी।

आगरा में दो बहनों की गुमशुदगी से खुला मामला
मार्च में आगरा से दो सगी बहनों की गुमशुदगी की जांच से इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। मामले में BNS की धाराओं और यूपी धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

ISIS की तरह सिग्नेचर ऑपरेशन
पूरे ऑपरेशन का तरीका ISIS जैसे आतंकी संगठनों की रणनीति जैसा पाया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों की भूमिकाएं—फंडिंग, कानूनी सलाह, सैफ हाउस, फर्जी दस्तावेज, मोबाइल-सिम उपलब्ध कराना व मानसिक रूप से प्रभावित करना—स्पष्ट रूप से सुनियोजित थीं।

अंतरराज्यीय समन्वय के साथ बड़ी सफलता
इस ऑपरेशन में 11 टीमों ने 6 राज्यों में छापेमारी की। यूपी एसटीएफ, एटीएस के साथ स्थानीय और केंद्रीय एजेंसियों का भी सहयोग लिया गया।

यह कार्रवाई यूपी पुलिस की सजगता और गंभीर अपराधों के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का स्पष्ट उदाहरण है।

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