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मोहन भागवत बोले— ‘नरेंद्र मोदी RSS की वजह से नहीं बने प्रधानमंत्री, राजनीतिक दल संघ का हिस्सा नहीं’

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

RSS शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में संघ प्रमुख का स्पष्ट संदेश
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि यह धारणा गलत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS की वजह से इस पद पर पहुंचे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही मोदी एक राजनीतिक दल का नेतृत्व करते हैं और RSS के कई स्वयंसेवक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं, लेकिन राजनीतिक दल RSS का हिस्सा नहीं हैं और संघ का राजनीति से कोई सीधा संबंध नहीं है।

समाज को जोड़ना ही RSS का मूल उद्देश्य
RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में आयोजित दो दिवसीय व्याख्यान शृंखला ‘संघ की 100 साल की यात्रा: नये क्षितिज’ के पहले दिन भागवत ने कहा कि संघ किसी के खिलाफ नहीं है, न सत्ता चाहता है और न ही दबाव समूह बनना उसका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि RSS का उद्देश्य समाज को एकजुट करना है और सकारात्मक प्रयासों को समर्थन व मजबूती देना है।

राजनीति और RSS—दो अलग इकाइयां
भागवत ने कहा कि RSS ने बहुत पहले तय कर लिया था कि वह समाज के एकीकरण के अलावा कोई और काम नहीं करेगा। उन्होंने दोहराया कि RSS राजनीति में शामिल नहीं है, हालांकि उससे जुड़े कुछ लोग राजनीतिक जीवन में सक्रिय हो सकते हैं। राजनीतिक दल एक स्वतंत्र इकाई हैं और RSS का हिस्सा नहीं हैं।

पथ संचलन, लाठी और अर्धसैनिक बल की धारणा
संघ प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि RSS कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं है। भले ही स्वयंसेवक नियमित रूप से ‘पथ संचलन’ करते हैं और लाठी रखते हैं, लेकिन RSS को अखाड़ा या सैन्य संगठन के रूप में देखना गलत है। संघ किसी घटना की प्रतिक्रिया में काम नहीं करता, बल्कि लंबे समय तक समाज निर्माण की प्रक्रिया में विश्वास रखता है।

हेडगेवार की सोच और RSS की स्थापना
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए भागवत ने कहा कि उन्होंने समाज में एकता की कमी जैसी समस्याओं को पहचाना और इसी कारण 1925 में RSS की स्थापना की। शुरुआती दिनों में हेडगेवार ने असहयोग आंदोलन का समर्थन किया, जिसके चलते उन पर राजद्रोह का आरोप लगा और उन्हें एक साल की जेल भी हुई।

आज़ादी के बाद भी स्वतंत्रता की गारंटी का सवाल
भागवत ने बताया कि हेडगेवार ने लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, डॉ. बीआर आंबेडकर और भगत सिंह जैसे नेताओं के साथ देश की स्थिति पर व्यापक चर्चाएं कीं। इन चर्चाओं के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि राजनीतिक स्वतंत्रता तो मिल जाएगी, लेकिन असली सवाल यह है कि भारत दोबारा गुलाम न बने, इसकी गारंटी कैसे होगी। इसी सोच से RSS का जन्म हुआ।

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