हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक आम ग्राहक को ₹1.7 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। मामला 17 साल पुराना है, जिसमें बैंक ने ग्राहक के खाते से बार-बार ₹400 बतौर “ईसीएस बाउंस चार्ज” काटे, जबकि खाते में पर्याप्त राशि मौजूद थी। आयोग ने इसे बैंक की “सेवा में स्पष्ट कमी” करार दिया।
विवाद की शुरुआत
वर्ष 2008 में राजधानी की एक महिला ने एचडीएफसी बैंक से कार लोन लिया था और ईएमआई की कटौती के लिए एसबीआई खाते को लिंक कराया था। कुछ महीनों बाद बैंक ने बताया कि कई ईएमआई “बाउंस” हो गई हैं, और हर बार ₹400 का शुल्क काट लिया गया। महिला के अनुसार, उनके खाते में पर्याप्त बैलेंस था, फिर भी बैंक ने गलत तरीके से पेनल्टी वसूली।
ग्राहक का संघर्ष
महिला ने बार-बार बैंक से शिकायत की, पर कोई समाधान नहीं मिला। अंततः उन्होंने 2010 में जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाज़ा खटखटाया। वहाँ से राहत न मिलने पर मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) पहुँचा, जहाँ से यह दोबारा दिल्ली राज्य आयोग को भेजा गया। लगभग 17 साल लंबी इस कानूनी लड़ाई का नतीजा आखिरकार 9 अक्टूबर 2025 को महिला के पक्ष में आया।
बैंक का पक्ष और आयोग का फैसला
एसबीआई ने दलील दी कि ईसीएस मैंडेट में गलत जानकारी दर्ज थी, जिसके कारण भुगतान विफल हुआ। पर महिला ने यह साबित किया कि कई बार उसी मैंडेट से किस्तें सफलतापूर्वक कटी थीं। आयोग ने माना कि गलती बैंक की थी और ग्राहक को वर्षों तक अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ी।
आयोग की टिप्पणी
आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता को 17 साल तक न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, जो बैंक की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इसे सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने एसबीआई को आदेश दिया कि वह महिला को काटे गए शुल्क, मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च सहित ₹1.7 लाख का मुआवज़ा दे।













