हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 25 मई : 2025
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा वकीलों के लिए शुरू की गई 50 करोड़ रुपये की सामूहिक स्वास्थ्य बीमा योजना पर विवाद खड़ा हो गया है। इस योजना के तहत देश के प्रमुख उद्योगपतियों से धन जुटाया गया है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वकीलों को चिकित्सा सहायता प्रदान करना है।
इस योजना के तहत नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और Apollo समूह की मदद से बीमा उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का लाभ SCBA के लगभग 2,700 से 2,800 सदस्यों को मिलने की उम्मीद है।
प्रमुख उद्योगपतियों ने दिया फंड
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस समूह के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इसके अलावा, अमित अंबानी, गौतम अडानी, एन. चंद्रशेखरन (टाटा), समीर मेहता (टोरेन्ट), जीएमआर के जीएम राव, कुमार मंगलम बिड़ला, अनिल अग्रवाल (वेदांता) और लक्ष्मी मित्तल जैसे उद्योगपतियों ने 5-5 करोड़ रुपये दिए हैं।
विवाद की वजह
SCBA के नवनिर्वाचित अध्यक्ष विकास सिंह ने इस योजना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस पर दोबारा विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा, “2 लाख रुपये के बीमा कवर के लिए हम जो प्रीमियम दे रहे हैं, वह 5 लाख के कवर की तुलना में कहीं ज्यादा है।” उनका मानना है कि यह योजना केवल आर्थिक रूप से कमजोर वकीलों के लिए होनी चाहिए, न कि सभी के लिए, जिसमें सिब्बल स्वयं भी शामिल हैं।
CSR फंड या व्यक्तिगत दान?
विकास सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह फंड CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) का हिस्सा है या सीधे संस्था को दिया गया है। यदि यह CSR का हिस्सा है, तो इसे लेकर टकराव नहीं होना चाहिए।
कपिल सिब्बल की सफाई
कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया कि, “डोनेशन किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि बार एसोसिएशन को दिया गया है।” उन्होंने कहा कि वह पेशेवर दायित्व निभा रहे हैं और यह किसी भी प्रकार की दोस्ती या निजी संबंधों का मामला नहीं है। उन्होंने बताया कि उद्योगपतियों से फोन कर के सीधे मदद मांगी गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब गौतम अडानी ने कहा कि 5 करोड़ बहुत कम है, तो उन्होंने कहा कि “अब आप इसे शुरुआत मानिए और अभी 5 करोड़ दे दीजिए।”

















