हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ मंगलवार 3 जून 2025 अलीगढ़
जीवन में अप्रोच( दृष्टिकोण) का बड़ा महत्व है, कहा जाता है कि जीवन एक कल्पवृक्ष है, आप जैसी कल्पना करोगे चीजे वैसी ही होती चली जाएगी ।
दृष्टिकोण ही आपको अपने मुकाम तक पहुंचाता है, कई बार लगता है मैने सबकुछ किया लेकिन फिर भी सफल नहीं हुआ, वहा हम अपने दृष्टिकोण का मूल्यांकन नहीं करते ।
अपने सोचने समझने का तरीका , रहन–सहन, किसके साथ उठना है, बैठना है इत्यादि चीजे मिलकर हमारा मानस बनाती है।
हमें यह भलीभांति तय कर लेना चाहिए कि हम कैसा जीवन चाहते है, उसी अनुरूप काम करना चाहिए। नहीं तो आपके व्यक्तित्व में इतने अंतर्विरोध हो जाएंगे कि आप विभाजित व्यक्तित्व के साथ घुटन के साथ जीने को मजबूर रहेंगे।
अध्यापन में आने के बाद सबसे ज्यादा समय युवाओं के साथ गुजरता है, उनमें देखता हूं कि बनाना चाहते है अधिकारी,बात करेंगे नेता जैसे। बनना चाहते है नेता बात करेंगे टपोरी जैसे । यह समस्या हर जगह हैं ।
मेरा यह प्रारंभ से ही मानना है कि आदमी का पैशन और जीवन दोनों लगभग दो चीजे है बहुत ही दुर्लभ भाग्यशाली और कर्मठी लोग है जो अपने पैशन के अनुरूप जीवन जी पा रहे।
जीवन चलाने के लिए हमें बहुत पहले से ही सोच लेना चाहिए कि क्या कर सकता हूं मैं ! उसके लिए आपकी काबिलियत से ज्यादा जरूरी समीकरण है आपका समय, परिवार, परिस्थिति, समाज इत्यादि। आप कोई ऐसा काम करने की सोच रहे जो आपके समीकरण के संतुलन में नहीं बैठ रहा तो जीवन भर सन्तुलन नहीं ही बैठेगा।
रैली,रील, फोटो इत्यादि सब चीज अच्छी लगती है जब आपके व्यक्तित्व पर शूट करे। नहीं तो लगता है शेर का खाल ओढ़ा हुआ सियार है, जो सच्चाई से भयभीत है और भाग रहा है।
आप कोई काम करें जो आपके व्यक्तित्व और व्यवस्था के अनुरूप हो। बाकी दीवाना बनने वाले लोग हर समय में रहे है, लेकिन ज्यादातर की परिणति बड़ी ही त्रासद हुई है उसमें।
इसलिए दृष्टिकोण का विकास कीजिए, सकारात्मक मानस बनाइए, अपने विकास में समय और ऊर्जा लगाइए , जीवन को सुंदर बनाइए। इसके लिए कोशिश करनी पड़ेगी, कड़ी मेहनत लगेगी, पसंद की दुनिया और लोग छोड़ने पड़ेंगे। तब कुछ हासिल होगा जो आपकी निजी कमाई है।
बाकी अनायास आराम से बैठे बैठे भी बहुत काम हो जाता है जैसे जवानी बीत जाएगी, बतरस और निंदा रस का मजा मिल जाएगा, हमेशा अपने कुछ होने का भ्रम रहेगा, किसी भैया जी का , चाचा जी का खास होने की डींग रहेगी। लेकिन आप अंदर से खोखले, बंजर, भयभीत और भगौड़े मानसिकता के हो जाएंगे। सबकुछ बड़ा ही डरावना होगा भविष्य में..!
हरिराम हरिवंश
संस्कृताचार्य














