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10,827 परिषदीय विद्यालयों का विलय,आंगनबाड़ी केंद्रों के शिफ्टिंग पर विवाद

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: 14 जुलाई 2025

परिषदीय विद्यालयों के विलय और आंगनबाड़ी केंद्रों के शिफ्टिंग पर विवाद: सर्वे से निर्णय, विरोध तेज

लखनऊ, 14 जुलाई। उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को पुनर्गठित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 10,827 कम नामांकन वाले परिषदीय विद्यालयों का विलय (पेयरिंग) कर दिया है। अब इन विद्यालयों के खाली भवनों में आंगनबाड़ी केंद्रों को शिफ्ट किया जाएगा। इस प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है, वहीं शिक्षकों और सामाजिक संगठनों में विरोध की लहर फैल गई है।

सीडीओ की अध्यक्षता में कमेटी करेगी सर्वे

बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देशित किया है कि खाली हुए विद्यालय भवनों में आंगनबाड़ी केंद्रों को शिफ्ट करने हेतु जिला स्तर पर सर्वे कराया जाए। इसके लिए सीडीओ की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी जिसमें बीएसए, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बीईओ और बाल विकास परियोजना अधिकारी शामिल होंगे। उन्हें 15 दिन के भीतर सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्वे के बाद ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावकों के साथ बैठक कर यह तय किया जाएगा कि किन भवनों में केंद्रों को शिफ्ट करना सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। 500 मीटर के दायरे में आने वाले केंद्रों को ही स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है, वह भी तभी जब नई इमारत बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं की दृष्टि से उपयुक्त हो।

शिक्षकों और युवाओं का विरोध, सोशल मीडिया पर चला अभियान

सरकारी निर्णय के विरोध में शिक्षकों और युवाओं ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जोरदार अभियान चलाया। डीएलएड मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विशु यादव ने बताया कि यह अभियान पूरे दिन ट्रेंड में रहा और लाखों लोगों ने इसमें भाग लिया। उनका आरोप है कि स्कूलों का विलय निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) का उल्लंघन है और इससे वंचित वर्ग के बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा।

28 जुलाई को मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे शिक्षक संगठन

विरोध को और मजबूत करने के लिए संयुक्त संघर्ष संचालन समिति (एस-4) की बैठक में निर्णय लिया गया कि 28 जुलाई को सभी जिलों में जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा। बैठक में संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने चिंता जताई कि इस विलय से न केवल शिक्षकों के पदोन्नति के अवसर खत्म होंगे, बल्कि रसोइयों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की नौकरियां भी खतरे में पड़ जाएंगी।

महासचिव आरके निगम ने कहा कि संगठन अब उन संगठनों से भी संपर्क करेगा जो अभी एस-4 का हिस्सा नहीं हैं, ताकि संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन खड़ा किया जा सके। बैठक में कई संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे।

एक ओर सरकार विद्यालय भवनों का बेहतर उपयोग करने की बात कह रही है, तो दूसरी ओर शिक्षक संगठनों को यह फैसला शिक्षा के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम प्रतीत हो रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों की शिफ्टिंग का निर्णय फिलहाल सर्वे और सामूहिक बैठक के बाद लिया जाएगा, लेकिन विरोध की तीव्रता को देखते हुए यह मुद्दा आगामी दिनों में और गंभीर हो सकता है।

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