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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अब तक नहीं मिला सरकारी बंगला, अस्थायी घर में रहने की नौबत

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

26 अगस्त 2025

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इन दिनों चर्चा में हैं क्योंकि उन्हें अब तक उनका सरकारी आवंटित बंगला नहीं मिल पाया है। परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति को कार्यकाल समाप्त होने के बाद तत्काल सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन धनखड़ के मामले में देरी हो रही है और उन्हें अस्थायी व्यवस्था में रहने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

4 एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग का बंगला तय, लेकिन मंत्री अब तक काबिज

सूत्रों के मुताबिक, 34, एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग स्थित बंगला धनखड़ के लिए आवंटित किया गया है। मगर इस बंगले में फिलहाल एक केंद्रीय मंत्री रह रहे हैं। उनके शिफ्ट होने और बाद में रेनोवेशन तथा सुरक्षा इंतजाम पूरे होने में समय लगेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह महज तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से हो रही देरी है, इसमें कोई राजनीतिक पहलू शामिल नहीं है।

सीपीडब्ल्यूडी को चाहिए 2 से 4 महीने का वक्त

सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) ने संकेत दिया है कि बंगले को खाली कराने और तैयार करने में दो से चार महीने का समय लगेगा। इस दौरान धनखड़ के पास दो विकल्प हैं—

  1. अस्थायी सरकारी आवास स्वीकार करना।
  2. निजी घर में रहने का निर्णय लेना।

अगर वे निजी घर में शिफ्ट होते हैं, तो यह भारतीय राजनीति में एक अभूतपूर्व स्थिति होगी क्योंकि अब तक कोई पूर्व उपराष्ट्रपति निजी आवास में नहीं रहा है।

वेंकैया नायडू को भी करना पड़ा था इंतजार

इससे पहले पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को भी कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ा था। हालांकि, उनके लिए अस्थायी सरकारी आवास की व्यवस्था तुरंत कर दी गई थी। दिल्ली में टाइप-VIII बंगले की उपलब्धता आसान नहीं होती। इसके लिए मौजूदा निवासी को शिफ्ट करना, सुरक्षा इंतजाम और मरम्मत का काम अनिवार्य होता है। यही वजह है कि प्रक्रिया अक्सर तीन महीने से अधिक खिंच जाती है।

इस्तीफे पर उठे सवाल और अमित शाह का बयान

धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें “नजरबंद” किया गया था। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सफाई दी।

उन्होंने कहा, “धनखड़ साहब ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है। उनका इस्तीफा पत्र साफ तौर पर इसका उल्लेख करता है। विपक्ष की ओर से किए जा रहे दावे पूरी तरह बेबुनियाद हैं।” शाह ने यह भी कहा कि धनखड़ ने संविधान के अनुरूप दायित्व निभाए और प्रधानमंत्री व सरकार के प्रति आभार जताया।

विपक्ष का हमला

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी उपराष्ट्रपति को इस्तीफे के बाद इस तरह “चुप कराने” की स्थिति देखने को मिली। विपक्ष का आरोप है कि धनखड़ पर दबाव डाला गया, लेकिन सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है।

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