हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
लखनऊ में उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने रविवार को एक संगठित फर्जी लोन गैंग का पर्दाफाश किया। यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से लोगों के नाम पर करोड़ों रुपये के लोन हड़प रहा था। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मैनेजर गौरव सिंह ही था। कार्रवाई में एसटीएफ ने गौरव सिंह समेत उसके तीन सहयोगियों नावेद हसन, अखिलेश तिवारी और इंद्रजीत सिंह को गिरफ्तार किया है।
गिरोह की कार्यप्रणाली
यह गैंग बेहद चालाकी से काम करता था। आरोपी पहले लोगों को मुद्रा, ऑटो और बिजनेस लोन दिलाने का झांसा देते थे। इसके बाद उनसे साधारण या खाली लोन आवेदन से जुड़े कागजात पर हस्ताक्षर करा लेते थे। कुछ महीनों बाद उन्हीं दस्तावेजों में हेरफेर कर फर्जी प्रमाणपत्र जोड़ दिए जाते थे। चूंकि बैंक मैनेजर शामिल था, इसलिए उसकी लॉगिन आईडी का उपयोग कर आसानी से लोन पास कर लिया जाता था। जिन लोगों के नाम पर लोन स्वीकृत होता था, उन्हें तब पता चलता जब उनके मोबाइल पर ईएमआई का मैसेज आने लगता।
बरामदगी और जांच
गिरफ्तारी के दौरान एसटीएफ ने चार लग्जरी कारें जब्त कीं, जिनमें एक बीएमडब्ल्यू भी शामिल है। साथ ही बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज और बैंक से जुड़े कागजात भी मिले। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पहले भी कई लोन हड़प चुका है। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
बैंकिंग सिस्टम पर सवाल
इस मामले ने बैंकिंग सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब खुद बैंक अधिकारी ही ठगी में शामिल हों तो आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? विशेषज्ञों का कहना है कि लोन प्रक्रिया में सख्त निगरानी, डिजिटल सुरक्षा और नियमित ऑडिट को और मजबूत करने की जरूरत है। एसटीएफ ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के लोन से जुड़े दस्तावेजों पर बिना पूरी जानकारी के हस्ताक्षर न करें और अजनबी लोगों के कहने पर बैंकिंग प्रक्रियाओं से न गुजरें।

















