हिन्दुस्तान मिरर दिनांक – 10 अक्टूबर 2025
देशभर में आज सुहागिन महिलाएं करवाचौथ का पावन व्रत धूमधाम से मना रही हैं। इस व्रत में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख के लिए दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं और रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।
इस वर्ष करवाचौथ का पर्व 10 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) को मनाया जा रहा है। दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और आसपास के शहरों में चंद्रमा का उदय रात 8:13 से 8:24 बजे के बीच होगा। वहीं लखनऊ और पूर्वी उत्तर प्रदेश में चांद 8:03 से 8:20 बजे के बीच दिखाई देगा। मुंबई, चेन्नई और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में 8:50 से 9:15 बजे के बीच चांद के दर्शन होंगे। स्थानीय समय के लिए पंचांग या समाचार अपडेट देखना आवश्यक है।
करवाचौथ की पारंपरिक पूजा विधि
चांद के निकलने के बाद महिलाएं छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद चांद को जल, कच्चा दूध, रोली और अक्षत से अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। पति के हाथों से जल या मिठाई ग्रहण करना शुभ माना जाता है। व्रत खोलने से पहले करवा चौथ की कथा सुनना या पढ़ना भी परंपरा का हिस्सा है।
पूजन सामग्री
पूजा के लिए लकड़ी की चौकी, लाल या पीला वस्त्र, भगवान शिव-पार्वती, गणेश और करवा की मूर्तियां या चित्र, कलश, श्रीफल, दीप, धूप, फल-फूल, गेहूं, चावल, पान, चंदन, अक्षत और करवा चौथ व्रत कथा पुस्तक आवश्यक मानी जाती है।
विशेष परिस्थिति में व्रत खोलना
अगर पति किसी कारणवश दूर हैं, तो महिलाएं उनके चित्र या वीडियो कॉल पर चेहरा देखकर व्रत खोल सकती हैं। वहीं, यदि मौसम खराब हो और चांद दिखाई न दे, तो भगवान शिव के उस स्वरूप के दर्शन करें जिनके मस्तक पर चंद्रमा है, और मन से प्रार्थना कर व्रत संपन्न करें।
करवाचौथ का व्रत सिर्फ एक रीति नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। यह पर्व वैवाहिक जीवन में स्थिरता, सौभाग्य और सुख-शांति का संदेश देता है।














