नई दिल्ली,।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम बैंक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत छोटे स्तर की साइबर ठगी का शिकार हुए ग्राहकों को अधिकतम 25 हजार रुपये तक मुआवजा दिया जाएगा। यह प्रस्ताव आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद बताया।
छोटी धोखाधड़ी पर मिलेगा लाभ
आरबीआई के अनुसार, यह सुविधा कम राशि वाली साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लागू होगी। यदि कोई ग्राहक गलती से ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी धोखेबाजों के साथ साझा कर देता है, तब भी उसे इस योजना के तहत राहत दी जाएगी। पीड़ित को बिना किसी पूछताछ के ठगी गई राशि का 85 प्रतिशत (अधिकतम 25 हजार रुपये) वापस किया जाएगा।
नुकसान का बंटवारा ऐसे होगा
मुआवजे की राशि तीन हिस्सों में बांटी जाएगी। कुल नुकसान का 70 प्रतिशत आरबीआई देगा, जो जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष से जारी किया जाएगा। 15 प्रतिशत राशि संबंधित बैंक वहन करेगा, जबकि शेष 15 प्रतिशत नुकसान ग्राहक को उठाना होगा। यह कोष लगभग 85 हजार करोड़ रुपये का है।
सिर्फ एक बार मिलेगा लाभ
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि साइबर धोखाधड़ी पर मुआवजे की यह सुविधा ग्राहक को केवल एक बार ही मिलेगी। इसके लिए एक विशेष सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई व्यक्ति पहले इस योजना का लाभ न ले चुका हो। वर्तमान में 50 हजार रुपये तक की धोखाधड़ी के मामले कुल मामलों का करीब 65 प्रतिशत हैं।
रिकवरी एजेंट और ऑनलाइन लेनदेन पर सख्ती
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि ऋण वसूली के लिए रिकवरी एजेंटों को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। इसके अलावा बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के काउंटर पर तीसरे पक्ष के उत्पादों की बिक्री और प्रचार को भी नियमन के दायरे में लाया जाएगा।
रेपो दर में कोई बदलाव नहीं
मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे कर्ज की ईएमआई में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं होगा। साथ ही ग्राहक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गलत उत्पाद बिक्री, कर्ज वसूली और ऑनलाइन लेनदेन में ग्राहकों की जिम्मेदारी सीमित करने से जुड़े तीन मसौदा नियम भी जारी किए जाएंगे।













