हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
पूर्णिया सांसद की गिरफ्तारी से बिहार की राजनीति गरमाई
नई दिल्ली। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और कांग्रेस समर्थित नेता पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शुक्रवार देर रात पटना स्थित उनके आवास से भारी हंगामे के बीच पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस कार्रवाई पर विपक्षी दलों और समर्थकों ने सवाल खड़े किए हैं और इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है।
प्रशांत किशोर की दो टूक—कानून सबके लिए बराबर
इस मामले पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कानून के सामने कोई भी बड़ा या छोटा नहीं होता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “केस चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, अगर किसी ने गलती की है तो उस पर कार्रवाई होगी ही होगी।” प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पप्पू यादव के समर्थक गिरफ्तारी के समय और तरीके को लेकर पुलिस की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।
नीट छात्रा की मौत पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले पर भी सरकार और प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि उनके दौरे के बाद ही इस मामले में एसआईटी का गठन किया गया और एक पुलिस अधिकारी को सस्पेंड किया गया। किशोर ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने शुरुआत में ही इसे आत्महत्या करार दे दिया था, जबकि कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।
1995 के मामले में गिरफ्तारी, गंभीर धाराएं लगीं
पुलिस के अनुसार, पप्पू यादव की गिरफ्तारी 1995 से जुड़े एक मामले में हुई है, जो गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से संबंधित है। पहले यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज था, जिसे अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत चलाया जा रहा है। सांसद पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और धमकी से जुड़ी धाराएं 419, 420, 468, 448, 506 और 120बी लगाई गई हैं। आरोप है कि उन्होंने धोखे से एक संपत्ति अपने कार्यालय के उपयोग में ले ली थी और अदालत में लगातार गैरहाजिर रहे थे।
समर्थकों का आरोप—नीट मुद्दे पर उठाई आवाज, इसलिए कार्रवाई
पप्पू यादव के समर्थकों का कहना है कि पटना में नीट छात्रा की मौत का मुद्दा लगातार उठाने के कारण सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। फिलहाल यह मामला कानून और राजनीति के टकराव का रूप ले चुका है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

















