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50% से घटकर 10% हुआ टैरिफ, तिरुप्पुर के कपड़ा कारोबार को मिली बड़ी राहत

तिरुप्पुर:हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: अमेरिका द्वारा भारतीय कपड़ा निर्यात पर लगाए गए टैरिफ में लगातार बदलाव के बावजूद तमिलनाडु का तिरुप्पुर अपने अमेरिकी ग्राहकों को बनाए रखने में सफल रहा है। कभी 50% तक पहुंचा टैरिफ अब घटकर 10% रह गया है, जिससे कपड़ा निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है और फैक्ट्रियों में फिर से रौनक लौट आई है।

टैरिफ में लगातार बदलाव से बढ़ी थी चिंता

पिछले साल अगस्त में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ बढ़ाकर 50% तक कर दिया था। इसके बाद फरवरी की शुरुआत में यह घटकर 18% हुआ और कुछ ही हफ्तों में इसे कम करके 10% कर दिया गया। इस दौरान तिरुप्पुर से लॉस एंजिलिस के लिए भेजी गई कई कपड़ों की खेप समुद्र में ही थीं। चूंकि अमेरिका में आयात शुल्क सामान के पहुंचने के बाद देना होता है, इसलिए रास्ते में मौजूद माल पर टैरिफ घटने से अमेरिकी आयातकों को काफी फायदा मिला।

कीमतों पर दोबारा हुई बातचीत

टैरिफ में बदलाव के कारण तिरुप्पुर के निर्यातकों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण रहा। कई कंपनियों ने अपने अमेरिकी ग्राहकों के साथ कीमतों पर दोबारा बातचीत की ताकि नए टैरिफ के अनुसार सौदे तय किए जा सकें। हालांकि ज्यादातर शिपमेंट पहले से तय FOB (फ्री ऑन बोर्ड) व्यवस्था के तहत भेजे गए थे। इसमें जहाज पर माल लोड होने तक की जिम्मेदारी निर्यातक की होती है और उसके बाद का खर्च खरीदार को उठाना पड़ता है।

अमेरिका को 16,000 करोड़ का निर्यात

तिरुप्पुर से तैयार कपड़े पहले सड़क मार्ग से तूतीकोरिन बंदरगाह तक भेजे जाते हैं। वहां से कंटेनरों को छोटे जहाजों के जरिए बड़े जहाज तक पहुंचाया जाता है, जो करीब दो महीने में अमेरिका पहुंचते हैं। वर्ष 2024-25 में तिरुप्पुर से अमेरिका को लगभग 16,000 करोड़ रुपये के कपड़ों का निर्यात हुआ।

रिश्ते बचाने के लिए कम मुनाफे में व्यापार

टैरिफ बढ़ने के दौरान कई भारतीय निर्यातकों ने अपने लंबे व्यापारिक रिश्तों को बनाए रखने के लिए कम मुनाफे या कभी-कभी नुकसान में भी कारोबार जारी रखा। तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार इस दौरान शहर के निर्यातकों को करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि उन्होंने ग्राहकों को डिस्काउंट देकर ऑर्डर बनाए रखने की कोशिश की। अमेरिकी खरीदारों ने भी कुछ हद तक अतिरिक्त लागत का बोझ उठाने पर सहमति जताई।

फैक्ट्रियों में फिर लौटी रौनक

अब टैरिफ घटने के बाद तिरुप्पुर की फैक्ट्रियों में कामकाज फिर तेज हो गया है। कपड़ा काटने, सिलाई और पैकिंग का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि निर्यातकों को भविष्य में फिर से नीतियों में बदलाव की आशंका बनी हुई है, लेकिन उनका मानना है कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार है और उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

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