MDR लागू होने की तैयारी के बीच ग्राहकों को राहत, बैंकों और UPI ऐप्स को शुल्क न थोपने के निर्देश
नई दिल्ली, एजेंसी। UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तैयारी के बीच सरकार ने ग्राहकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ने देने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है। सरकार बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और भुगतान क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों के साथ MDR व्यवस्था को लागू करने के तौर-तरीकों पर चर्चा कर रही है।
सरकार ने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मर्चेंट से संबंधित MDR की लागत ग्राहकों से नहीं वसूली जाए। साथ ही UPI ऐप्स पर छिपे हुए या अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क लगाए जाने की संभावनाओं पर भी नजर रखी जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक से किसी भी रूप में अलग से शुल्क न लिया जाए।
P2P भुगतान रहेंगे मुफ्त
व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले UPI लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा। इसके अलावा, ₹2,000 तक के ज्यादातर मर्चेंट भुगतान भी MDR के दायरे से बाहर रखे गए हैं। हालांकि, स्टॉक मार्केट और कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI भुगतानों के लिए 0.02 प्रतिशत MDR तय किया गया है। इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है। यह दर तय करने से पहले SEBI, स्टॉक एक्सचेंज और अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया गया।
ब्रोकरों की चिंताओं की समीक्षा करेगा SEBI
SEBI ने MDR को लेकर स्टॉक ब्रोकरों की चिंताओं की समीक्षा करने की बात कही है। विशेष रूप से उन मामलों पर विचार किया जाएगा, जिनमें ग्राहक UPI के जरिये राशि ट्रांसफर करता है, लेकिन बाद में कोई ट्रेड नहीं करता। ब्रोकरों ने ऐसे लेनदेन में MDR लागत और उसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
सरकार के मुताबिक MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच वितरित होने वाली लागत है। सरकार का जोर MDR व्यवस्था को पारदर्शी तरीके से लागू करने और UPI के उपयोगकर्ताओं को किसी छिपे या अतिरिक्त शुल्क से बचाने पर है।
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