अलीगढ़: हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :जैसे जैसे सर्दी आने को हैं , अलीगढ़ में राजनिति का तापमान बढ़ रहा है। “हिन्दुस्तान मिरर “ की विजय सिंह पप्पू से बात हुईं तो उन्होंने सपा में शामिल होने की बात की पुष्टि की है।
बरौली विधायक व पूर्व मंत्री रहे ठा दलवीर सिंह के पौत्र विजय सिंह पप्पू सपा में शामिल होते ही राजनितिक पंडितों ने अपने अपने तरीके से जोड़ घटाव शुरू कर दिया है ।भाजपा ने भी अपने गणित को दोबार टटोलना शुरू कर दिया है।

पल-पल बदलती राजनीति में कल तक अजय सिंह व विजय सिंह पप्पू भाजपाई थे लेकिन आज सपाई हैं। भाजपा से मौजूदा विधायक व पूर्व मंत्री ठा जयवीर सिंह अभी भारी विजय के साथ बरौली पर क़ाबिज़ हैं। ज़ाहिर है अजय-विजय सिंह के लिए बरौली विजय “एक आग का दरिया है और डूब के जाना है“ जैसी है।
बेशक बरौली पर भाजपा के समीकरण प्लस- माइनस हुए हैं किन्तु सत्ता के ताले की चाबी अतंत: जनता के हाथ में ही है।
लगभग 100 दिन शेष हैं चुनावी शंखनाद होने को है…. भाजपा ने फुल स्पीड में मैराथन कार्यक्रमों के ज़रिए फ़िनिश लाइन पार करने की योजना बना ली है। भाजपा के शीर्ष नेता यूपी में डेरा जमाए हुए हैं। अलीगढ़ में भी भाजपा सभी विधानसभाओं में तोबाडतोड़ कार्यक्रम कर रही है।
“समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव ठा सोमवीर सिंह से जब हिन्दुस्तान मिरर ने बात की तो उन्होंने कहा कि ठा अजय-विजय सिंह के पार्टी में आने से बरौली पर सपा मज़बूत हुई है। बरौली से कौन चुनाव लड़ेगा के प्रश्न पर प्रदेश सचिव बोले टिकिट देने का फ़ैसला पार्टी का हैं। दोनों भाई आये हैं उनका स्वागत है। टिकिट किसको मिलेगी ये तय नहीं हैं।”
क्या कहता है बरौली का अंकगणित –
बरौली के दोनों वीर चुनाव की लड़ाई में 4 बार आमने-सामने रहे हैं , 2 बार ठा जयवीर सिंह जीते हैं और 2 बार ठा दलवीर सिंह- मामला बराबरी पर छूटा है अभी तक –
2002 : ठा जयवीर सिंह जीते – ठा दलवीर सिंह (हारे )
2007: ठा जयवीर सिंह जीते – ठा दलवीर सिंह (हारे )
2012 : ठा दलवीर सिंह जीते – ठा जयवीर सिंह (हारे)
2027: ठा दलवीर सिंह जीते – ठा जयवीर सिंह (हारे)
2022: में दोनों वीर भाजपा में ही थे तब ठा जयवीर सिंह बड़े मार्जिन से जीते।
गणित कहता है कि तू डाल- डाल मैं पात-पात , आमने सामने की लड़ाई में चुनावी कुश्ती अभी तक बराबर रही है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि 2027 में 5वीं बार … ऊँट किस करवट बैठेगा ?
आँकड़े बताते हैं कि भाजपा ने बरौली में पिछली 11 विधानसभा चुनाव में से ३ बार जीत दर्ज की हैं वहीं समाजवादी पार्टी अभी खाता नहीं खुला है।
बरौली पर क्या जेन-जी बनाम जेन-जी होगा मुक़ाबला ?
बरौली के दोनों ही वीरों के पास राजनितिक लेगेसी की एक बड़ी श्रंखला है।
ठा दलवीर सिंह के ख़राब स्वास्थ्य के चलते राजनिति में पौत्रों की एंट्री के बाद दलवीर सिंह एक तरीके अब मार्गदर्शक ही हैं। ठा अजय सिंह -ठा विजय सिंह ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी से मैदान में ताल ठोकी है।

बेशक ठा जयवीर सिंह अभी राजनिति में सक्रिय हैं उसके बावजूद राजनितिक जानकारों का कहना है कि वह भी अपने पुत्र को चुनावी राजनिति में एंट्री कराना चाहते हैं।
जिस प्रकार से जेन-जी को लेकर देशभर में भाजपा का फ़ोकस बढ़ा है,अंदाज़ा लगाया जा रहा हैं कि बरौली पर शायद इस बार मुक़ाबला जेन-जी बनाम ज़ोन-जी हो।
सूत्रों का कहना है कि दोनों तरफ़ से बरौली विजय के लिए क़िलेबंदी शुरू हो गयी है।तिकडमों और क़यास का बाज़ार गर्म है।














