हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
➡️ शिकायत के बाद सरकार का बड़ा कदम
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 558 मदरसों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) योजना में कथित घोटाले की जांच के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई अखिल भारतीय पसमांदा समाज मंच की शिकायत के बाद की गई है, जिसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। मामले के सामने आते ही शिक्षा विभाग और मदरसा संचालकों में हड़कंप मच गया है।
➡️ क्या हैं मुख्य आरोप
शिकायत के अनुसार कई मदरसों में बच्चों की संख्या कागजों में बढ़ाकर दिखाई जा रही है, ताकि ज्यादा राशन और फंड हासिल किया जा सके। आरोप है कि मिड-डे मील योजना के तहत मिलने वाले अनाज और बजट का सही उपयोग नहीं हो रहा है और सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इससे जरूरतमंद बच्चों तक भोजन का लाभ पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा।
➡️ जांच के लिए सख्त निर्देश
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक मोनिका रानी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि तय मानकों के अनुसार बच्चों को भोजन मिल रहा है या नहीं। साथ ही, बजट आवंटन और वास्तविक लाभार्थियों की संख्या की भी गहन जांच की जाएगी। तय समयसीमा में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
➡️ पारदर्शिता पर सरकार का जोर
योगी सरकार पहले से ही मदरसों के आधुनिकीकरण और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रयास कर रही है। इससे पहले अवैध और बिना मान्यता वाले मदरसों का सर्वे भी कराया जा चुका है। अब मिड-डे मील जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जांच शुरू करना यह दर्शाता है कि सरकार बच्चों के अधिकारों और सुविधाओं को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।
➡️ बच्चों के हित में कार्रवाई का संदेश
सरकार ने साफ किया है कि बच्चों के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मिड-डे मील योजना का लाभ सही तरीके से जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को रोका जा सके।
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