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सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर की ऐतिहासिक और चर्चित ‘रानी कोठी’ एक बार फिर सुर्खियों में है। लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की इस भव्य धरोहर को जिला प्रशासन ने हाल ही में निजी कब्जे से मुक्त कर अपने नियंत्रण में ले लिया है। दशकों से विवादों और कानूनी लड़ाइयों में घिरी यह कोठी अब सामाजिक उपयोग की दिशा में नया अध्याय शुरू कर सकती है। प्रशासन यहां वृद्धाश्रम बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ा है इतिहास
सीतापुर शहर के बट्सगंज क्षेत्र के तामसेनगंज इलाके के पास स्थित रानी कोठी का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1906 में ब्रिटिश सरकार ने भूखंड संख्या 1568 को नवीनगर राजपरिवार को 30 वर्ष की लीज पर दिया था। यह भूमि मूल रूप से कुंवर निहाल सिंह को उद्यान विकसित करने के उद्देश्य से दी गई थी, लेकिन बाद में यहां एक आलीशान कोठी का निर्माण कराया गया।
महारानी कुंवरि पृथ्वीपाल के नाम पर इसका नाम ‘रानी कोठी’ रखा गया और धीरे-धीरे यह क्षेत्र की प्रमुख ऐतिहासिक पहचान बन गई।
दहेज से जुड़ी रानी कोठी की कहानी
समय के साथ इस कोठी का संबंध कसमंडा रियासत से भी जुड़ गया। जानकारी के अनुसार, कसमंडा नरेश राजा दिनेश प्रताप सिंह की बहन सविता कुमारी उर्फ आभा रानी के विवाह के दौरान रानी कोठी और नवीनगर स्टेट दहेज के रूप में दिए गए थे। इसके बाद राजा जवाहर सिंह अपने परिवार के साथ यहां रहने लगे और यह राजपरिवार की स्थायी संपत्ति बन गई।
वर्षों तक चला स्वामित्व विवाद
रानी कोठी का स्वामित्व लंबे समय तक विवादों में रहा। आभा रानी और राजा की दूसरी पत्नी वीरप्रभा के बीच मालिकाना हक को लेकर अदालतों में कानूनी संघर्ष चलता रहा। बाद में कोठी का कब्जा वीरप्रभा पक्ष को मिला। हाल के वर्षों में इस संपत्ति पर कुछ निजी व्यक्तियों का कब्जा होने की बात सामने आई।
1936 में खत्म हुआ पट्टा, फिर भी बना रहा कब्जा
जिस नजूल भूमि पर यह कोठी बनी थी, उसका 30 वर्ष का पट्टा वर्ष 1936 में समाप्त हो गया था। नियमों के अनुसार पट्टा खत्म होने के बाद संपत्ति राज्य सरकार के अधिकार में चली जानी चाहिए थी। प्रशासनिक जांच में निजी स्वामित्व का कोई वैध आधार नहीं मिला।
17 तालों में सील हुई कोठी
19 मई 2026 को जिलाधिकारी न्यायालय के आदेश के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कोठी को खाली कराया। पूरे परिसर को सरकारी नियंत्रण में लेकर अलग-अलग स्थानों पर कुल 17 ताले लगाए गए।
अब समाजसेवा की दिशा में कदम
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, रानी कोठी में वृद्धाश्रम स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इससे न केवल ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण होगा बल्कि जरूरतमंद बुजुर्गों को सहारा भी मिल सकेगा।
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